फरीदाबाद : विजयादशमी असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक : दत्तात्रेय होसबाले
विजयादशमी महोत्सव का राष्ट्र वंदना और अनुशासित संघ दर्शन के साथ पथ संचलन
फरीदाबाद, 20 अक्टूबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के सान्निध्य में फरीदाबाद पश्चिम महानगर के विवेकानंद नगर की केशव बस्ती में मंगलवार को विजयादशमी महोत्सव का आयोजन किया गया। एनएच-4 एयर फ़ोर्स मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन अधिकारियों के रूप में दत्तात्रेय होसबाले, सरकार्यवाह; जयकिशन, सह विभाग संघचालक; संजय, महानगर संघचालक तथा त्रिलोक, सह विभाग कार्यवाह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विजयादशमी के महत्व, संघ की स्थापना के उद्देश्य, राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान तथा संघ के विभिन्न सेवा प्रकल्पों पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान दत्तात्रेय होसबाले ने अपने उद्बोधन में संघ की स्थापना के उद्देश्य, विजयादशमी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा राष्ट्र और समाज के प्रति स्वयंसेवकों के दायित्वों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है। यह पर्व समाज में साहस, अनुशासन, एकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने संघ के विभिन्न सेवा एवं सामाजिक प्रकल्पों की चर्चा करते हुए बताया कि समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में निरंतर कार्य करने के उद्देश्य से अनेक संगठन और संस्थान कार्यरत हैं। इनमें वनवासी कल्याण आश्रम, विद्यार्थी परिषद, विद्या भारती, सेवा भारती तथा अन्य सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने संघ के शारीरिक, बौद्धिक एवं संगठनात्मक कार्यों के महत्व को भी रेखांकित किया। कार्यक्रम में राकेश, सह प्रांत कार्यवाह; किशन, अखिल भारतीय संपर्क टोली सदस्य तथा देव प्रसाद, अध्यक्ष विद्या भारती प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में त्रिलोक, सह विभाग कार्यवाह ने संघ द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए बताए गए पंच परिवर्तन के विषयों पर भी प्रकाश डाला। इनमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे विषय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन विषयों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने देश में आपातकाल के समय संघ पर लगाए गए प्रतिबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्वयंसेवकों ने संगठनात्मक कार्यों को जारी रखने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले संगठनों और सेवा प्रकल्पों के माध्यम से सामाजिक कार्यों का विस्तार हुआ, जिससे राष्ट्र एवं समाज के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखने में सहायता मिली। उन्होंने इस प्रसंग को संघ के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसी भी संगठन के विषय में निष्कर्ष निकालते समय तथ्यों और प्रमाणों को महत्व दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक एकता, अनुशासन, सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना रहा। विजयादशमी महोत्सव ने उपस्थित स्वयंसेवकों को समाजहित में कार्य करने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने की प्रेरणा दी।
हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर