फरीदाबाद : ‘253 रुपए’ के लिए लड़ी ढाई साल कानूनी लड़ाई

 

नहीं लगी नंबर प्लेट,कंपनी को पैसे लौटाने का आदेश

फरीदाबाद, 07 अगस्त (हि.स.)। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के लिए दो बार ऑनलाइन शुल्क लेने के बावजूद सेवा उपलब्ध नहीं कराने पर डिप्टी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन ने लिंक उत्सव रजिस्ट्रेशन प्लेट प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ फैसला सुनाया है। कमीशन ने कंपनी को कंज्यूमर से वसूली गई राशि लौटाने के साथ मानसिक पीड़ा और केस के खर्च का भी भुगतान करने का निर्देश दिया है। डिप्टी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन के अध्यक्ष अमित अरोड़ा और सदस्य इंदिरा भड़ाना की पीठ ने यह आदेश बल्लभगढ़ की तिरखा कॉलोनी निवासी आदित्य चौधरी द्वारा दायर परिवाद पर दिया है। शिकायत के अनुसार उनके चाचा विजय की स्प्लेंडर प्लस बाइक पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगवाने के लिए जनवरी 2024 को 253.03 रुपए ऑनलाइन जमा किए गए थे। कंपनी ने 15 जनवरी की फिटमेंट तिथि तय की, लेकिन निर्धारित दिन कोई भी कर्मचारी नंबर प्लेट लगाने नहीं पहुंचा। बाद में पोर्टल पर आवेदन रद्द दिखाया गया और जमा राशि भी वापस नहीं की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 16 जनवरी को दोबारा 253.03 रुपए जमा कर नया आवेदन किया। इस बार 22 जनवरी की फिटमेंट तिथि तय हुई, लेकिन फिर भी कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। कुछ समय बाद दूसरा आवेदन भी रद्द कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने कई बार कंपनी और एजेंसी को ई-मेल भेजकर समस्या बताई। कंपनी ने वाहन के रिकॉर्ड में त्रुटि होने की बात कही, जबकि आरटीओ ने रिकॉर्ड पूरी तरह सही बताया। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं होने के कारण उसे पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। वहीं, ग्राहक सेवा केंद्र से भी कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उसने न्याय के लिए डिप्टी कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। लगातार अनुपस्थित रहने पर कमीशन ने उसे एकपक्षीय घोषित कर दिया। कमीशन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि कंपनी कंज्यूमर को समय पर सेवा देने में विफल रही, जो सेवा में कमी का स्पष्ट मामला है। कमीशन ने अपने आदेश में कंपनी को शिकायतकर्ता के 253 रुपए वापस करने, मानसिक प्रताडऩा के लिए दो हजार 200 रुपए और मुकदमे के खर्च के रूप में 2 हजार 200 रुपए देने का निर्देश दिया है। आदेश की प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करना होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर