फरीदाबाद : नगर निगम ने पांच हजार पशु पकड़े, फिर भी सडक़ें नहीं हुई खाली
फरीदाबाद, 28 सितंबर (हि.स.)। फरीदाबाद में सडक़ों पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं को अब दूसरे जिलों की गौशालाओं में भेजा जाएगा। नगर निगम का कहना है कि शहर की तीनों गौशालाओं में पहले ही क्षमता से अधिक पशु रखे हुए हैं। ऐसे में अब पड़ोसी जिलों की गौशालाओं में पशुओं को भेजने की तैयारी की जा रही है। इसकी शुरुआत नूंह की गोशाला से किए जाने की योजना है। शहर में बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नगर निगम ने रोजाना निगरानी की व्यवस्था की है। निगम कमिश्नर यशेंद्र सिंह ने पांचों जोन के ज्वाइंट कमिश्नरों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। ज्वाइंट कमिश्नर प्रतिदिन स्वास्थ्य शाखा से रिपोर्ट लेंगे। इसमें यह जानकारी ली जाएगी कि दिनभर में कितने पशुओं को सडक़ों से पकड़ा गया और कितने पशुओं को गोशाला तक पहुंचाया गया। निगम से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक 2 साल में अवारा पशुओं से कारण हुए हादसे में 15 लोग घायल हुए है जबकि 6 लोगों की मौत हो चुकी है। दावा है कि कि वर्ष 2024 से वर्ष 2026 के बीच करीब पांच हजार लावारिस पशुओं को पकडक़र विभिन्न गौशालाओं में छोड़ा गया। इनमें सबसे ज्यादा 2044 पशु श्री गोपाल गोशाला में, 1739 गो रक्षा सदन मवई में और 578 गो मानव सेवा ट्रस्ट में रखे गए हैं। इसके अलावा देवाश्रय एनिमल हॉस्पिटल में 52, छांयसा गोशाला में 43 और नवादा गोशाला में 319 पशु भेजे गए। इसके बावजूद शहर की सडक़ों पर पशुओं की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही नजर आ रही है। निगम की ओर से यह भी जानकारी जुटाई जाएगी कि सडक़ों पर पशु छोडऩे वाले कितने लोगों के खिलाफ जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों को पशुओं को सडक़ से हटाने के साथ-साथ उनके मालिकों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। निगम का उद्देश्य शहर की मुख्य सडक़ों और रिहायशी क्षेत्रों में बेसहारा पशुओं की संख्या को कम करना है। औद्योगिक नगरी में सडक़ों पर घूमने वाले पशु वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। रात के समय सडक़ पर बैठे पशु दिखाई नहीं देने से हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। करीब दो सप्ताह पहले अंधेरे में सडक़ पर बैठी गाय बाइक सवार को दिखाई नहीं दी थी। बाइक के गाय से टकराने के बाद हादसे में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद निगम की कार्रवाई पर भी सवाल उठे थे। फरीदाबाद में नगर निगम की निगरानी में तीन गौशालाएं हैं। निगम की ओर से इन गौशालाओं को फंड भी दिया जाता है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार तीनों गौशालाओं में उनकी क्षमता से अधिक पशु पहले से मौजूद हैं। इसी वजह से अब पशुओं को दूसरे जिलों की गौशालाओं में भेजने का विकल्प अपनाया जा रहा है। नगर निगमकमिश्नर यशेंद्र सिंह ने बताया कि सडक़ों से बेसहारा पशुओं को हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / -मनोज तोमर