हिसार : दो लाख क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे, मौसम की मार से किसानों की बढ़ी चिंता
नारनौंद अनाज मंडी में धीमी खरीद और उठान से बिगड़े
हालात
बारिश हुई तो किसानों को भारी नुकसान की आशंका
हिसार, 29 अक्टूबर (हि.स.)। मौसम के बिगड़ते मिजाज
और धान की धीमी खरीद व उठान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नारनौंद की अनाज मंडी
और खेतों में करीब दो लाख क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। हल्की बारिश के
चलते फसल में नमी आने लगी है। ऐसे में यदि बारिश तेज हुई तो किसानों को भारी आर्थिक
नुकसान उठाना पड़ सकता है। मंडी में पहले से ही शेड के नीचे हजारों क्विंटल धान रखा
हुआ है, जबकि खरीद और उठान की धीमी गति के कारण किसानों की फसल खुले में पड़ी रहने
को मजबूर है।
किसानों का कहना है कि मंडी में फसल की आवक लगातार
हो रही है, लेकिन खरीद और उठान में तेजी नहीं आने से जगह की कमी हो गई है। इसके चलते
कई किसानों को अपनी फसल खेतों में ही जमा करके रखनी पड़ रही है। खुले में रखी धान की
फसल पर बारिश का खतरा मंडरा रहा है। किसानों ने चिंता जताई कि यदि फसल भीग गई तो उसकी
गुणवत्ता प्रभावित होगी और उसे बेचने में भी परेशानी आएगी।
मंडी में 1.91 लाख क्विंटल धान पहुंचा, उठान
93 हजार क्विंटल
नारनौंद अनाज मंडी में अब तक करीब एक लाख 91 हजार
क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। इसमें से एक लाख 21 हजार क्विंटल धान की खरीद की जा
चुकी है, जबकि करीब 93 हजार क्विंटल धान का ही उठान हुआ है। खरीद और उठान के बीच अंतर
होने के कारण मंडी में धान का दबाव बढ़ गया है। वहीं, मंडी में पर्याप्त जगह नहीं मिलने
से करीब एक लाख क्विंटल धान किसानों के खेतों में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है।
मौसम में नमी और हल्की बारिश के कारण किसानों
को फसल की सुरक्षा की चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश का दौर बढ़ा
तो धान भीगने से उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ
फसल बेचने में भी अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों ने उठाए सुविधाओं की कमी के सवाल
किसान कुलबीर, संदीप, वीरेंद्र, जोगिंदर, शमशेर,
रणधीर और भारत सिंह सहित अन्य किसानों ने गुरुवार काे बताया कि मंडी में फसल बेचने के दौरान उन्हें
कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार, मंडी में पर्याप्त सुविधाएं
नहीं होने और फसल का उठान धीमी गति से होने के कारण धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है।
जगह की कमी के चलते कुछ किसानों ने अपनी फसल खेतों में ही जमा कर रखी है। किसानों ने
कहा कि खेती में पूरे साल मेहनत और पूंजी लगाने के बाद फसल तैयार होती है, लेकिन मंडी
में पहुंचने के बाद भी उसकी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। उन्होंने आशंका जताई कि
यदि बारिश तेज हुई तो खुले में रखी धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। किसानों
ने खरीद और उठान की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा फसल को बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त
इंतजाम करने की मांग की।
तिरपाल लगाने के निर्देश दिए : मार्केट कमेटी
सचिव
मार्केट कमेटी के सचिव रवि श्योरान ने बताया कि
मंडी में किसानों की धान की फसल की खरीद की जा रही है। अब तक एक लाख 21 हजार क्विंटल
धान की खरीद हो चुकी है और उठान का कार्य भी जारी है। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण
फसल भीगने से बचाने के लिए तिरपाल लगाने को कहा गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर