कैथल: पराली जलाने की बजाय किसान इसे बनाएं आय का साधन : अमित खत्री
कैथल, 04 नवंबर (हि.स.)। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक अमित खत्री ने बुधवार को किसानों से आह्वान किया कि वे धान की पराली जलाने की बजाय उसका उचित प्रबंधन करें और इसे आय का अतिरिक्त साधन बनाएं। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों को खेती में कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग को कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।निदेशक अमित खत्री कैथल की हनुमान वाटिका के हॉल में आयोजित किसान मेले में किसानों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पहुंचने पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। अमित खत्री ने कहा कि वर्तमान समय में प्राकृतिक खेती को अपनाना बेहद जरूरी है। किसानों को शुरुआत में अपने कुल कृषि क्षेत्र के 20 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती करनी चाहिए। इससे धीरे-धीरे रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कम होगा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इससे किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ आमजन को रसायनमुक्त अनाज उपलब्ध करवाने में भी मदद मिलेगी।उन्होंने कहा कि कैथल के किसान भी प्राकृतिक खेती अपनाने में आगे आएंगे। इस दिशा में किसानों को शुरुआत में किसी प्रकार की परेशानी आती है तो कृषि विभाग की ओर से उन्हें हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा रही है। इसी कड़ी में वे कैथल पहुंचे हैं, जहां अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों से योजनाओं के संबंध में फीडबैक लिया जा रहा है। कृषि उपनिदेशक डॉ. रविंद्र जाखड़ ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। हनुमान वाटिका में आयोजित मेले में किसानों को प्राकृतिक खेती, तिलहन फसलों, गन्ना उत्पादन और फसल विविधीकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने किसानों से खेतों में पेस्टिसाइड का कम से कम उपयोग करने और धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे