स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में फरीदाबाद की 14वीं रैंकिंग

 

- 179.7 अंक के साथ दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में बनाई जगह

चंडीगढ़, 07 सितंबर (हि.स.)। स्वच्छ वायु की स्थिति को लेकर जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में हरियाणा का प्रदर्शन पूरी तरह से सिमट गया है। प्रदेश में फरीदाबाद एकमात्र ऐसा शहर है, जिसने रैंकिंग में अपनी जगह बनाई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में फरीदाबाद ने 179.7 अंक हासिल कर 14वीं रैंक प्राप्त की है।

सर्वेक्षण के परिणामों के मुताबिक 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की सूची में कुल 48 शहर शामिल हैं। हरियाणा से इसमें सिर्फ फरीदाबाद का नाम है। प्रदेश के गुरुग्राम, हिसार, पानीपत, रोहतक, करनाल, अंबाला, सोनीपत और पंचकूला सहित अन्य प्रमुख शहर इस शहर रैंकिंग में शामिल नहीं हैं। तीन से 10 लाख तथा तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की जारी सूची में भी हरियाणा के किसी शहर का नाम शामिल नहीं है। इसलिए सर्वेक्षण की उपलब्ध शहर रैंकिंग के आधार पर प्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व केवल फरीदाबाद का ही रहा है।

शहरों की राष्ट्रीय रैंकिंग में भले ही हरियाणा से सिर्फ फरीदाबाद शामिल है, लेकिन वार्ड स्तर की स्टेट लेवल अवार्ड सूची में फरीदाबाद के तीन वार्डों का उल्लेख किया गया है। श्रेणी-1 में फरीदाबाद वार्ड-28, जबकि श्रेणी-2 में फरीदाबाद वार्ड-1 और वार्ड-32 शामिल हैं। इससे साफ है कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में हरियाणा के शहरों की भागीदारी अभी सीमित है। जहां फरीदाबाद ने बड़े शहरों की राष्ट्रीय रैंकिंग में 14वां स्थान हासिल किया है, वहीं प्रदेश के दूसरे प्रमुख शहरों को इस सूची में जगह नहीं मिलने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

हरियाणा के लिए विश्व बैंक ने हरियाणा क्लीन एयर प्रोजेक्ट फार सस्टेनेबल डेवलपमेंट घोषित कर रखी है। विश्व बैंक ने इसके लिए 300 मिलियन डालर (लगभग 2,500 करोड़ रुपये के आसपास) का वित्तपोषण मंजूर किया है। मार्च 2026 में भारत सरकार, हरियाणा सरकार और विश्व बैंक के बीच इसके लिए समझौता भी हो चुका है। इस परियोजना के अंतर्गत गुरुग्राम और फरीदाबाद में ई-बस सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। करीब 2,000 छोटे एवं मध्यम उद्योगों को स्वच्छ और अधिक दक्ष तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। एयर क्वालिटी मानिटरिंग नेटवर्क को बढ़ाया जाएगा और एक डेटा आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और नियंत्रण बेहतर तरीके से हो सके। हरियाणा ने लगभग 438 मिलियन डालर के छह वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा बना रखी है, जिसमें राज्य के अपने संसाधन और अन्य वित्तीय स्रोत भी शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा