हरियाणा सरकार ने सीआरआईडी को दिया स्वतंत्र विभाग का दर्जा
- हारट्रोन पर होगा सीआरआईडी का प्रशासनिक नियंत्रण
चंडीगढ़, 10 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा में परिवार पहचान पत्र, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कामकाज को एक विभाग के अधीन लाने की तैयारी है। नागरिक संसाधन सूचना विभाग (सीआरआईडी) को स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने के साथ हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हारट्रोन) को भी इसके प्रशासनिक नियंत्रण में लाया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस व्यवस्था को मंजूरी दी गई।खास बात यह है कि सीआरआईडी को स्वतंत्र विभाग बनाने की मंजूरी कैबिनेट अप्रैल 2023 में ही दे चुकी थी, लेकिन अब उस फैसले को प्रभावी करने के लिए विभागीय कार्य आवंटन में बदलाव किया गया है। सीआरआईडी के पास पहले से परिवार पहचान प्राधिकरण, हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (हरसैक) और दृश्या का प्रशासनिक जिम्मा है। ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं की देखरेख भी इसी विभाग के पास है। अब हारट्रोन के जुड़ने से डिजिटल परियोजनाओं, तकनीकी संसाधनों और संबंधित प्रशासनिक कामकाज में समन्वय बढ़ाने की व्यवस्था होगी।
हारट्रोन राज्य सरकार की नोडल तकनीकी एजेंसी है। यह सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े बुनियादी ढांचे की खरीद, ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को तकनीकी सहयोग, तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध कराने और परामर्श सेवाएं देने का काम करती है। ये गतिविधियां सीआरआईडी के कार्यक्षेत्र से जुड़ी हैं। सरकार का तर्क है कि दोनों को एक प्रशासनिक ढांचे में लाने से फैसलों और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर तालमेल होगा।
हरियाणा में पत्रकारों की आपात मदद अब 5 लाख रुपये तक
बीमारी, दुर्घटना या मृत्यु जैसी आपात स्थिति में आर्थिक मदद के लिए हरियाणा के पात्र पत्रकारों और उनके परिवारों को अब पहले के मुकाबले दोगुनी राशि मिल सकेगी। राज्य सरकार ने मीडिया कर्मियों के लिए सहायता की अधिकतम सीमा प्रति मामले 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। कैबिनेट बैठक में हरियाणा मीडिया पर्सनल वेलफेयर फंड एडमिनिस्ट्रेशन स्कीम में संशोधन को मंजूरी दी गई। यह फैसला मुख्यमंत्री की 2 मार्च, 2026 को विधानसभा में बजट पेश करते समय की गई घोषणा के अनुरूप है। सरकार ने आपात स्थितियों में मीडिया कर्मियों को दी जाने वाली सहायता की सीमा बढ़ाने का वादा किया था, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ लागू करने का रास्ता साफ हुआ है। संशोधित व्यवस्था के तहत बीमारी, मृत्यु, दुर्घटना या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में जरूरत पड़ने पर पात्र मीडिया कर्मियों के साथ उनके आश्रितों और कानूनी उत्तराधिकारियों को भी बढ़ी हुई सहायता मिल सकेगी। हालांकि, सहायता पाने के लिए योजना के मौजूदा पात्रता मानदंड और अन्य नियम-शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा