जींद : मनरेगा बहाली की मांग पर मजदूरों ने किया प्रदर्शन

 


जींद, 15 मई (हि.स.)। मनरेगा संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर शुक्रवार को मनरेगा बहाली के मुद्दे को लेकर मनरेगा मजदूरों प्रदर्शन किया और सरपंच प्रतिनिधि संदीप पूनिया को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन से पहले मनरेगा मजदूर व अन्य ग्रामीण गांव अहिरका के अंबेडकर भवन में इक्कठे हुए और रोष सभा की। सीटू जिला उपाध्यक्ष कपूर सिंह ने मनरेगा मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार जब से सत्ता में आई है सबका साथ, सबका विकास, गरीबों की पिछड़ों की हितेषी होने का दावा करती है। जबकि पिछले 12 वर्षों से देश प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा सरकारों बड़े-बड़े पूंजीपतियों को लूट की छूट दी है और गरीबों को और गरीब बनाने का काम किया है।

उन्होंने बताया कि मनरेगा जैसा ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार देने वाला कानून इस कानून के बनने से अनेक को गांव में गांव के रास्ते, तालाबों की खुदाई, नहरों की सफाईए गांव की शामलात व बंजर भूमि को समतल करने गांव में पेड़ लगाने आदि कार्यों को सफलतापूर्वक किया गया। जिससे गांव में पशुओं के लिए साफ पानी मिल पाया, आखिरी टेल तक नहरी पानी पहुंचा और ग्रामीण मजदूरों को अपनी आजीविका चलाने में भी आर्थिक सहयोग मिला लेकिन भाजपा की मोदी सरकार ने लगातार मनरेगा के बजट में भारी कटौतियां की और अनेकों तरह का अड़ंगा डाला गया।

इस योजना में राज्यों पर बजट का भोज बढ़ाया गया और ग्राम सभाओं व पंचायत के अधिकार खत्म कर दिए गए। इसलिए आज देश भर का मनरेगा मजदूर हड़ताल पर है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा के तहत 200 दिन काम और 800 मजदूरी दी जाए। मनरेगा कानून बहाल किया जाए। वीबी रामजी रद्द किया जाए। सभी गरीबों के बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाएं। गांव में पीने के साफ पानी का प्रबंध किया जाए। 40 वर्ष पहले गरीबों के काटे गए प्लाटों का मालिकाना हक दिया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा