जींद : पेंशनर्ज ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया

 


जींद, 21 अप्रैल (हि.स.)। अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्ज फेडरेशन के आह्वान पर हरियाणा रिटायर्ड कर्मचारी संघ ने मांगों को लेकर मंगलवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पेंशनर्ज ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला प्रधान विक्रम सिंह ने किया जबकि संचालन उप प्रधान छज्जू राम नैन ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए हरियाणा किसान सभा के अध्यक्ष मास्टर बलबीर सिंह ने बताया कि कर्मचारी और रिटायर्ड कर्मचारियों की मांगों पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। जो मांगें कर्मचारियों ने व रिटायर्ड कर्मचारियों ने लड़ कर प्राप्त की थी, उन्हें धीरे-धीरे वापस लिया जा रहा है। चाहे वह पुरानी पेंशन प्रणाली को बंद करना है, चाहे एलटीसी की सुविधा को समाप्त करना है।

सरकार सार्वजनिक शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के सिस्टम को खत्म करने पर तुली हुई है और निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। जिला प्रधान विक्रम सिंह ने रिटायर कर्मचारियों की मुख्य मांगों की चर्चा की और बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा की बहुत जरूरत है। पर सरकार न तो बढ़ती उम्र के साथ पेंशन में वृद्धि कर रही है और न ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा पूर्ण रूप से लागू कर रही है। रेल और हवाई यात्रा में मिलने वाली सुविधाएं भी सरकार ने वापस ले ली है। एलटीसी की सुविधा खत्म करके सरकार ने अपना सही रूप दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र और हरियाणा सरकार की नीतियां पूरी तरह जन विरोधी हैं और कारपोरेट परस्त हैं।

समाज के सभी वर्ग सरकार की नीतियों से त्रस्त हैं। आज देश के किसान को अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और उसकी फसल आज मंडियों में बिखरी पड़ी है तथा खरीद व उठान नगण्य है। इस सरकार ने मजदूरों के 44 कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी चरित्र का परिचय दिया है। उन्होंने मांग की कि लोकसभा में पारित वित्त विधेयक 2025 को वापस करके रिटायर्ड कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग का पूरा लाभ दिया जाए और पुरानी पेंशन नीति लागू की जाए। कॉम्यूटेशन की राशि की कटौती 10 वर्ष आठ मास तक ही की जाए। नए बिजली बिल को वापस लिया जाए और जनविरोधी नीतियों को समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा विभाग में पुराने अध्यापकों का अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करने का जो तुगलकी फरमान जारी किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा