जींद : आशा, मिड-डे मील वर्करों ने किया प्रदर्शन, सांसद प्रतिनिधि को सौंपा ज्ञापन
जींद, 04 अक्टूबर (हि.स.)। स्कीम वर्करों ने रविवार को अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और मांगों को लेकर सोनीपत सांसद सतपाल ब्रह्मचारी के प्रतिनिधि वजीर गांगोली को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन से मिड डे मिल वर्कर्स एवं आशा वर्कर्स लघु सचिवालय के बाहर जिला अध्यक्ष नीलम तथा मिड डे मिल वर्कर्स यूनियन की जिला उपप्रधान पिंकी की अध्यक्षता में एकत्रित हुई।
वर्करों को संबोधित करते हुए आशा वर्कर यूनियन की जिला उपप्रधान मुकेश तथा मिड डे मिल वर्कर्स यूनियन जिला सहसचिव कविता ने कहा कि आंगनवाड़ी, आशा, मिड डे मिल सहित विभिन्न स्कीमों में काम करने वाली लाखों महिला वर्कर्स सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर लागू कर रही हैं लेकिन उन्हें आज तक कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया। बेहद कम मानदेय पर काम लेने के बावजूद काम का लगातार बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ विकास और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन दूसरी तरफ शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की सार्वजनिक संपत्तियों और सरकारी संस्थाओं को निजी एवं कॉरपोरेट हितों के हवाले करने की नीतियों का सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर, किसान और कर्मचारी वर्ग पर पड़ रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, मनरेगा और श्रम अधिकारों को मजबूत करने के बजाय यदि सरकारी संस्थाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर किया जाता है तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को होता है। उन्होंने मांग की कि 45वें श्रम सम्मेलन के निर्णय के अनुसार सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स, आशा वर्कर्स, मिड डे मिल वर्कर्स, क्रेच वर्कर्स एवं हेल्पर्स सहित सभी स्कीम वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सभी स्कीम वर्कर्स को 42 हजार न्यूनतम वेतन दिया जाए तथा 12 महीने का वेतन दिया जाए। सभी स्कीम वर्कर्स को ग्रेच्युटी एवं रिटायरमेंट लाभ दिया जाए तथा 21 हजार मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रद्द की जाए। किसी भी मिड डे मिल वर्कर की छंटनी न की जाए तथा छंटनी किए गए वर्करों की बहाली की जाए। एफआरएस को अनिवार्य करने पर तुरंत रोक लगाई जाए तथा सभी लाभार्थियों को आईसीडीएस की सभी सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं।
हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा