हिसार : यूके प्रतिनिधिमंडल से मिले गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय के डीन इंटरनेशनल अफेयर्स
हिसार, 21 मार्च (हि.स.)। यूके-भारत उच्च शिक्षा
सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ब्रिटिश काउंसिल, नई दिल्ली
में गुणवत्ता आश्वासन एवं अंतर्राष्ट्रीयकरण विषयों पर उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस अवसर
पर ब्रिटिश काउंसिल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) स्काॅट मैक्डोनाल्ड उपस्थित
रहे। हिसार के गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से डीन
इंटरनेशनल अफेयर्स प्रो. ओपी सांगवान ने बैठक में भाग लिया और विश्वविद्यालय की वैश्विक
शैक्षणिक सहयोग तथा उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने शनिवार काे इस पहल का
स्वागत करते हुए कहा कि यह संवाद यूके और भारत के बीच शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा
देने और द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों
को वैश्विक स्तर पर नए अवसर प्राप्त होंगे तथा शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार आएगा।
कुलसचिव डा. विजय कुमार ने कहा कि इस प्रकार
के संवाद और सहयोग कार्यक्रम विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को नई दिशा प्रदान
करेंगे और संस्थान को वैश्विक मंच पर और सशक्त बनाएंगे।
प्रो. ओपी सांगवान ने बताया कि ब्रिटिश काउंसिल,
यूनाइटेड किंगडम का एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो सांस्कृतिक संबंधों और शैक्षिक
अवसरों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है तथा वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों को मजबूत
बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैठक के दौरान अनुसंधान सहयोग, अकादमिक साझेदारी,
गुणवत्ता मानक तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों (जैसे कार्यशालाएं और सम्मेलन) पर विशेष
रूप से चर्चा की गई। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता आश्वासन तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर
दिया गया।
इसके अतिरिक्त बैठक में यूके-भारत शिक्षा विजन
2035 पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया, जिसमें संकाय एवं छात्र गतिशीलता, संयुक्त
शैक्षणिक कार्यक्रम, द्विपक्षीय शिक्षा (ट्रांसनेशनल एजुकेशन), विश्वविद्यालय-उद्योग
सहयोग को सुदृढ़ करना तथा अंतर्राष्ट्रीय परिसर स्थापित करने जैसे विषय शामिल रहे।
यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ साउथांपटन द्वारा गुरुग्राम में अपना पहला भारतीय
कैंपस स्थापित करने की योजना का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। यह पहल भारत में वैश्विक
स्तर की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। इससे
न केवल भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता की शिक्षा अपने देश में ही प्राप्त
होगी, बल्कि यूके और भारत के बीच शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान साझेदारी तथा ज्ञान के आदान-प्रदान
को भी नई गति मिलेगी। यह पहल दोनों देशों के शिक्षा संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करते
हुए भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका
निभाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर