हिसार : जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग जरूरी : प्रो. बीआर कम्बोज
स्पार्क परियोजना के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय
सम्मेलन का समापन
हिसार, 27 फरवरी (हि.स.)। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय
में डेसीफरिंग दी पोटेंशियल ऑफ क्लाइमेट रेजिलिएंट फंक्शनल क्रॉप फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर
एंड एग्रो-इंडस्ट्रीज (डीपीसीएफसी-एसएएआई-2026)’ विषय पर स्पार्क परियोजना के अंतर्गत
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने शुक्रवार काे समापन अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक चुनौती बना हुआ
है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और कीट-रोग समस्याएं कृषि व्यवस्था को
प्रभावित कर रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में जलवायु-सहनशील फसल किस्मों का विकास अनिवार्य
हो गया है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी स्थिर उत्पादन दे सके। उन्होंने कहा की मोटा
अनाज, दलहन एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलें न केवल पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं,
बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक हैं। इन फसलों का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन
कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊर्जा प्रदान करता है। आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत
बीज विकास तथा वैज्ञानिक अनुसंधान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उपरोक्त महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. राजेश
गेरा ने कार्यक्रम में सभी का स्वागत किया। सम्मेलन के तकनीकी सत्र के दौरान विभिन्न
प्रख्यात वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से निपटने के लिए अपने सुझाव
एवं व्याख्यान प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 600 से अधिक प्रतिभागियों
ने भाग लिया, देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने 32 लीड पेपर प्रस्तुत किए, शोधार्थियों ने
139 मौखिक प्रस्तुति दी जबकि 384 से अधिक पोस्टर प्रस्तुत किए गए। जैव रसायन विभाग
की अध्यक्ष डॉ. जयंती टोकस ने तीन दिवसीय सम्मेलन के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
कीट विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने सम्मेलन में हुए 11 सत्रों की तकनीकी
रिर्पोट प्रस्तुत की।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर