जींद : हाइड्रोजन ट्रेन का फिर से हुआ ट्रायल
जींद, 28 अप्रैल (हि.स.)। रेलवे जंक्शन पर मंगलवार को मुख्य रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) जनक कुमार गर्ग हाइड्रोजन प्लांट के निरीक्षण के लिए पहुंचे। इसके बाद दोपहर को हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर ट्रायल के लिए सोनीपत रूट के लिए रवाना हुए। उनके साथ डीआरएम पुष्पेश रमन त्रिपाठी, एडीआरएम डिंपी गर्ग सहित अन्य टीम भी साथ में रवाना हुई। जैसे ही ट्रेन जंक्शन पर पहुंची तो ट्रेन को देखने के लिए यात्री उत्सुक नजर आए। ट्रेन के पास यात्रियों की भीड़ को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने स्पेलशल अनाउंसमेंट करवाई कि वे रोहतक जाने के लिए हाइड्रोजन ट्रेन में नहीं चढ़ें। उनके लिए दूसरी ट्रेन इसी प्लेटफार्म पर थोड़ी देर में आएगी।
यात्रियों ने ट्रेन के अंदर झांक कर देखा। इस यात्री ने ट्रेन के अंदर देख कर बोला कि इसमें सिर्फ पानी के कैन रखे हैं। वहीं यात्रियों ने ट्रेन के साथ सेल्फी भी ली। हाइड्रोजन ट्रेन जींद जंक्शन के लिए रवाना हुई। जो दोपहर बाद दो बजकर 57 मिनट पर पांडू पिंडारा स्टेशन पर पहुंची। यहां 14 मिनट ठहराव के बाद ट्रेन दोपहर बाद आगे रवाना हुई। ट्रेन लगभग पांच बजे सोनीपत पहुंची। वहीं से सीसीआरएसए डीआरएम, एडीआरएम सहित दिल्ली से आई टीम अपने स्पेशल रेलवे यान में दिल्ली के लिए रवाना हुए। रास्ते में ट्रेन की ब्रेक व गति की जांच की गई। ट्रेन पांच बजे के बाद सोनीपत से जींद के लिए रवाना हुई। रास्ते में ट्रेन की स्पीड 85 किलोमीटर प्रति घंटा की रही।
हाइड्रोजन प्लांट के निरीक्षण के बाद ट्रेन को ट्रायल पर लेकर जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में डीआरएम पुष्पेश रमन त्रिपाठी ने कहा कि जब भी रेलवे नए प्रोजेक्ट को शुरू करता है तो उसमें जरूरी निरीक्षण किए जाते हैं। इसमें अलग-अलग निरीक्षण होते हैं। जिसमें अलग-अगल तरह के सुरक्षा निरीक्षण, आरडब्ल्यूएसओ ट्रायल सहित अन्य जांच की जाती है जो यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रख कर की जाती है। इसी कड़ी में मंगलवार को सीसीआरएस मंगलवार को हाइड्रोजन प्लांट व ट्रेन का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने पहले हाइड्रोजन प्लांट का निरीक्षण किया और उसके बाद ट्रेन का ट्रायल किया जाएगा। जिसकी रिपोर्ट वह उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। डीआरएम ने कहा के सबसे लेटेस्ट तकनीक का प्लांट जींद जंक्शन पर बन रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। नई तकनीक के दौरान कुछ समस्याएं सामने आती हैं लेकिन रेलवे कर्मचारी और अधिकारी नए चीजें खोज कर लाइबल आपरेशन के लिए प्रयासरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा