एनजीटी ने पानीपत के सीमेंट प्लांट पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट

 


-एनजीटी ने दिये डेढ़ माह में जांच पूरी करने के आदेश

पानीपत, 27 फ़रवरी (हि.स.)। हरियाणा के पानीपत के गांव खुखराना स्थित सीमेंट प्लांट द्वारा कथित रूप से फैलाए जा रहे प्रदूषण और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।

ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच के जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) को पूर्व उल्लंघनों पर अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा कर डेढ़ माह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वकील ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया था कि 27 फरवरी 2025 को संयुक्त समिति द्वारा सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट में प्लांट के भीतर प्रदूषण नियंत्रण मानकों की कई गंभीर अनदेखी पाई गई थी।

एनजीटी के अनुुसार, प्लांट का कुल क्षेत्रफल 34.6 एकड़ है, जिसमें से नियमानुसार 11.72 एकड़ में ग्रीन बेल्ट विकसित होनी चाहिए थी। जबकि जांच में पाया गया कि खुखराना गांव की ओर कोई ग्रीन बेल्ट विकसित नहीं की गई है। गांव की ओर अतिरिक्त 950 वर्ग मीटर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट का प्रस्ताव केवल फाइलों में था। धरातल पर कुछ भी नहीं मिला।

गांव की ओर बनी चारदिवारी की ऊंचाई लगभग 10-12 फीट थी, जो धूल के गुबार को गांव तक पहुंचने से रोकने के लिए अपर्याप्त पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दीवार सीमेंट या कच्चा माल ले जाने वाले ट्रकों की ऊंचाई से कम से कम तीन फीट अधिक होनी चाहिए और प्लांट परिसर में धूल दबाने के लिए ट्रैक्टर और टैंकरों के माध्यम से पानी का छिड़काव किया जा रहा था, जिसे समिति ने पूरी तरह अप्रभावी माना, तथा पौड ऐश हैंडलिंग और ट्रक पार्किंग क्षेत्र में भारी मात्रा में धूल उड़ती मिली, जिसके समाधान के लिए स्थाई फिक्स्ड वॉटर स्प्रिंकलर लगाने का सुझाव दिया गया था। पौधों पर जमी धूल की परत ट्रक पार्किंग क्षेत्र के आसपास विकसित ग्रीन बेल्ट के पौधों पर धूल की मोटी परत जमा पाई गई। मामले की सुनवाई के दौरान प्लांट प्रबंधन ने कुछ उल्लंघनों को बाद में ठीक करने का दावा किया था, लेकिन नहीं किया।

अब हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले नियमों के उल्लंघन के लिए प्लांट प्रबंधन के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस समय संयुक्त समिति ने दौरा किया, उस समय प्लांट बंद था। इस कारण से प्लांट के सभी हिस्सों का पूरी तरह से निरीक्षण नहीं किया जा सका और न ही गांव खुखराना के भीतर और बाहर वायु गुणवत्ता की वास्तविक मॉनिटरिंग की जा सकी।

ट्रिब्यूनल ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को तय की है। कोर्ट ने एचएसपीसीबी के वकील के अनुरोध पर उन्हें मामले की फिर से जांच करने और छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल वर्मा