प्रॉपर्टी आईडी में जींद रियासत की रानी सहित नप सचिव, पटवारी के खिलाफ हेराफेरी पर केस

 


जींद, 09 अक्टूबर (हि.स.)। अपोलो रोड के पास स्थित करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन को हड़पने की साजिश रचने और राजस्व रिकॉर्ड में कथित तौर पर हेराफेरी करने के आरोप में शहर थाना पुलिस ने शुक्रवार काे जींद रियासत की रानी सहित नप सचिव, पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह ने शिकायत में बताया कि उनके दादा बलदेव सिंह ने वर्ष 1965 में जमीन खरीदी थी। वर्तमान में वह अपने भाई अभिजीत सिंह और मां सुधा चौधरी के साथ जमीन के मालिक और कब्जाधारी हैं। जमाबंदी वर्ष 2024-25 में जमीन खेवट नंबर 1217, खतौनी नंबर 1411 और खसरा नंबर 65//58 के तहत 50 कनाल 2 मरले दर्ज है। शिकायत के अनुसार नगर परिषद की प्रॉपर्टी आईडी में पहले जमीन का क्षेत्रफल 2421.860 वर्ग गज दर्ज था। जिसे कथित तौर पर बढ़ा कर 6647 वर्ग गज कर दिया गया। आरोप है कि इसमें मालिक का नाम बदल कर हरसिमरन कौर और इंदरजीत कौर के नाम दर्ज कर दिए गए। प्रोपर्टी का पता और अधिकृत स्थिति भी बदल दी गई। जबकि तस्वीर और लोकेशन पहले वाली जमीन की ही दिखाई देती रही। शिकायतकर्ता ने वेबसाइट के डिजिटल रिकॉर्ड और भौतिक सिजरे में भी कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। आर्थिक अपराध शाखा की जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया खसरा नंबर में कथित हेराफेरी, प्रोपर्टी आईडी का क्षेत्रफल बढ़ाने और इसके आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराने के प्रयास से संबंधित संज्ञेय अपराध सामने आने की बात कही गई। रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच की सिफारिश की गई थी। मामले में हरसिमरन कौर, जींद रियासत की रानी इंदरजीत कौर, पटवारी नरेश चहल, नगर परिषद के सचिव सुमित दहिया और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

उधर, जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर ने कहा कि एक साथ लगती दो प्रोपर्टी हैं। खसरा नंबर 65 शिकायतकर्ता और हमारा 64 है। कमेटी में खसरा नंबर 64 की आईडी के लिए आवेदन किया हुआ है। सेटेलाइट से फोटो लेते समय सिस्टम ने 65 की लोकेशन उठा ली। जिससे एनए के नाम दर्ज शिकायतकर्ता की प्रोपर्टी की आईडी उनके नाम चढ़ गई। उपायुक्त द्वारा इस पर फिर से एनए किया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा