कैग की रिपोर्ट में खुलासा: आमदनी बढ़ी, खर्च और कर्ज का दबाव भारी
जीएसडीपी 11.83 प्रतिशत बढ़ा, राजस्व प्राप्तियां 5.05 प्रतिशत बढ़ीं
कुल खर्च का 88.94 प्रतिशत राजस्व व्यय
पूंजीगत व्यय कुल उधारी का सिर्फ 17.67 प्रतिशत
राज्य की देयताएं एक साल में 10.52 प्रतिशत बढ़ीं
2,491.65 करोड़ की अदत्त देनदारियां भी सामने आईं
चंडीगढ़, 01 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा की अर्थव्यवस्था भले ही बढ़ रही हो और कर संग्रह में सुधार हुआ हो, लेकिन भारी प्रतिबद्ध खर्च, बढ़ता कर्ज और पूंजीगत निवेश की सीमित गुंजाइश राज्य की वित्तीय सेहत पर दबाव बनाए हुए हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में राज्य के वित्तीय प्रबंधन की यही दोहरी तस्वीर सामने आई है।
मंगलवार को रिपोर्ट को विधानसभा में रखा गया है। इसे 13 अप्रैल को राज्य सरकार को भेजा गया था। वर्ष 2024-25 में हरियाणा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) पिछले साल के मुकाबले 11.83 प्रतिशत बढ़ा। राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य की हिस्सेदारी 3.67 प्रतिशत रही और पिछले पांच वर्षों में यह हिस्सेदारी अपेक्षाकृत स्थिर रही।
राज्य की राजस्व प्राप्तियां भी 5.05 प्रतिशत बढ़ीं, जिसका प्रमुख कारण जीएसटी समेत कर संग्रह और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढऩा रहा। कुल प्राप्तियों में राज्य के अपने कर राजस्व की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई रही। हालांकि, गैर-कर राजस्व सात प्रतिशत घटा, जबकि केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में 17.6 प्रतिशत की कमी आई। कैग ने सबसे बड़ी चिंता राज्य के खर्च के ढांचे को लेकर जताई है। 2024-25 में कुल व्यय का 88.94 प्रतिशत राजस्व व्यय रहा। प्रतिबद्ध लागत और सब्सिडी अकेले राजस्व व्यय का करीब 64 प्रतिशत, कुल व्यय का 57 प्रतिशत और राजस्व प्राप्तियों का लगभग 76 प्रतिशत रही। इस भारी बोझ के बीच पूंजीगत व्यय बजटीय प्रावधान से कम रहा। खास तौर पर पूंजीगत व्यय कुल उधारी का केवल 17.67 प्रतिशत रहा। कैग के मुताबिक इससे बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों में निवेश के लिए राजकोषीय गुंजाइश सीमित होती है।
हरियाणा राज्य राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में तय राजस्व घाटे के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सका। राज्य की कुल देयताएं पिछले पांच वर्षों में लगातार बढ़ीं और एक साल में 10.52 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कैग ने चेताया कि बढ़ती देनदारियों से भविष्य में मूलधन और ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ेगा तथा सरकार की वित्तीय लचीलापन क्षमता प्रभावित हो सकती है। सरकारी निवेश से मिलने वाला रिटर्न भी सरकार की उधारी पर औसत ब्याज दर से कम रहा।
रिपोर्ट में 2,491.65 करोड़ की अदत्त (पेंडिंग) देनदारी सामने आई हैं। यह 2024-25 के जीएसडीपी का करीब 0.21 प्रतिशत और राजकोषीय घाटे का 7.19 प्रतिशत है। इनमें स्थानीय निकायों को वित्त आयोग के 1,170.27 करोड़ के अनुदानों का लंबित अंतरण, 827.54 करोड़ के लंबित रिफंड, विभागों के खिलाफ डिस्कॉम की 253.82 करोड़ की ऊर्जा देनदारी और ऋण स्टॉक में शामिल नहीं किए गए 146.53 करोड़ के बजट से बाहर के उधार शामिल हैं। इसके अलावा एनपीएस/सांविधिक निधियों में राज्य अंशदान तथा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट से जुड़े ₹93.49 करोड़ की कम, न हुई या ब्याज संबंधी देनदारियां भी शामिल हैं। कैग ने इनकी समयबद्ध पहचान, लेखांकन और रिपोर्टिंग पर जोर दिया है।
--------------
हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा