हिसार : दो एकड़ के किसान राजपाल श्योराण के बाजरे के बिस्किट की विदेशों तक धूम
कोथ कलां के किसान ने खेत की उपज से तैयार किए अनूठे उत्पाद
इंग्लैंड, अमेरिका, नेपाल, मोरक्को और श्रीलंका तक पहुंच रहे ऑनलाइन ऑर्डर
हिसार, 24 अक्टूबर (हि.स.)। अगर मन में कुछ अलग करने का जुनून और मेहनत करने
का जज्बा हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। गांव कोथ कलां के
किसान राजपाल श्योराण ने इस बात को साबित कर दिखाया है। महज दो एकड़ जमीन पर प्राकृतिक
खेती करने वाले राजपाल ने बाजरे से बिस्कुट तैयार कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके
बनाए बिस्कुट की मांग न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में है, बल्कि विदेशों से भी ऑनलाइन
ऑर्डर मिल रहे हैं। राखीगढ़ी महोत्सव में भी उनके उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र
बने और उन्हें पर्यटकों से अच्छे ऑर्डर मिले।
राजपाल श्योराण ने करीब दस साल पहले प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। उनका
उद्देश्य खेती में रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल पर निर्भरता कम करते हुए शुद्ध तरीके
से कृषि उत्पाद तैयार करना और दूसरे किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करना था। उन्होंने
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनी फसल से सीधे खाद्य उत्पाद तैयार करने का विचार किया,
ताकि उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। आज उनकी फसल तैयार होने से पहले ही देश के अलग-अलग
हिस्सों से लोग ऑनलाइन ऑर्डर बुक करवाने लगे हैं।
किसान मेले से मिली बाजरे के बिस्कुट बनाने की प्रेरणा
राजपाल ने शनिवार काे बताया कि वर्ष 2017 में दिल्ली में आयोजित एक किसान मेले में उन्होंने
बाजरे से बने बिस्कुट बिकते हुए देखे थे। इसी से उन्हें अपने खेत में उगाए गए बाजरे
से बिस्कुट तैयार करने की प्रेरणा मिली। गांव लौटने के बाद उन्होंने इस दिशा में काम
शुरू किया और प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों से बिस्कुट बनाने का प्रयास किया। उन्होंने
बाजरे के साथ रागी, मक्का, अजवाइन, तिल, हल्दी और देसी खांड जैसी सामग्री का इस्तेमाल
कर विभिन्न प्रकार के बिस्कुट तैयार करने शुरू किए। शुरुआत में उन्हें बाजार में अपनी
जगह बनाने के लिए मेहनत करनी पड़ी, लेकिन धीरे-धीरे उनके उत्पादों की पहचान बढ़ती चली
गई।
विदेशों तक पहुंच रहे उत्पाद, ऑनलाइन मिल रहे ऑर्डर
राजपाल श्योराण के अनुसार, उनके बनाए बिस्कुट अब इंग्लैंड, अमेरिका, नेपाल,
मोरक्को और श्रीलंका सहित कई देशों में ऑनलाइन ऑर्डर के माध्यम से भेजे जा रहे हैं।
दो एकड़ जमीन पर खेती करने वाले किसान के लिए अपने खेत की उपज से उत्पाद तैयार कर अंतरराष्ट्रीय
बाजार तक पहुंचना उनके सफर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राखीगढ़ी महोत्सव में भी उनके
बिस्कुट को लोगों ने पसंद किया। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए पर्यटकों ने उनके
उत्पादों में रुचि दिखाई और कई ऑर्डर मिले। राजपाल श्योराण ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि दो एकड़ जमीन पर खेती
करने वाला किसान अपने खेत की उपज से खुद उत्पाद तैयार करके विदेशों तक बेच सकेगा, लेकिन
मेहनत और दृढ़ निश्चय से उनका सपना साकार हुआ।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर