भगवंत मान अगर सच्चे हैं तो फर्जी रिपोर्ट की जरूरत क्यों पड़ी:रेखा शर्मा

 


-पंजाब के युवा नशे की समस्या में उलझा तो धार्मिक संस्थाओं में हो रहे विवाद

चंडीगढ़, 24 जून (हि.स.)। हरियाणा की राज्य सभा सांसद रेखा शर्मा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को विवादित वीडियो के मुद्दे पर घेरते हुए कहा है कि अगर वह सच्चे हैं तो उन्हें फर्जी रिपोर्ट बनवाने की जरूरत क्यों पड़ी।

बुधवार को चंडीगढ़ स्थित विधायक दल कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में रेखा शर्मा ने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। रेखा शर्मा ने कहा कि यदि किसी राज्य को कमजोर करना हो तो उसकी आस्था और उसकी युवा शक्ति पर प्रहार कर दीजिए। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज पंजाब में दोनों ही मोर्चों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। एक ओर पंजाब का युवा चिट्टा और अन्य नशों की भयावह समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य की सर्वोच्च धार्मिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर विवाद उत्पन्न किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों और शिकायतकर्ता द्वारा सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। आरोप है कि 16 जून 2026 को गुरुग्राम स्थित फाइव स्टार होटल क्राउन प्लाजा में एक गुप्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें लुधियाना के पुलिस कमिश्नर तथा एसपी का नाम भी सामने आ रहा है, कथित रूप से शामिल थे।

रेखा शर्मा ने कहा कि सार्वजनिक रूप से सामने आए दावों के अनुसार इस बैठक का उद्देश्य मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवादित वीडियो को लेकर एक अनुकूल फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाना था। मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि बैठक के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं तथा कथित व्हाट्सएप चैट्स भी सामने आई हैं, जिनमें रिपोर्ट के विभिन्न हिस्सों में बदलाव, निष्कर्षों को संशोधित करने तथा रिपोर्ट को विशेष दिशा देने संबंधी चर्चाएं दिखाई गई हैं।

उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता जसप्रीत सिंह द्वारा जारी वीडियो में यह दावा किया गया है कि उसे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा संपर्क किया गया, गुरुग्राम बुलाया गया और मुख्यमंत्री के पक्ष में रिपोर्ट तैयार करवाने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उसके माध्यम से निजी साइबर विशेषज्ञों से रिपोर्ट तैयार करवाई गई, बाद में उसमें कथित रूप से बदलाव करवाए गए तथा इस कार्य के लिए 10 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन संस्थाओं से रिपोर्ट ली गई, वे सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशालाएं नहीं थीं। यदि यह सब सत्य है तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

रेखा शर्मा ने कहा कि इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह विवाद श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा और उसके निर्णयों से जुड़ा हुआ है। श्री अकाल तख्त साहिब सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है, जिसकी प्रतिष्ठा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

रेखा शर्मा ने कहा कि पंजाब की माताएं आज अपने बच्चों को नशे के कारण खो रही हैं। राज्य के अनेक जिले चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में यदि पुलिस और प्रशासन का ध्यान कानून व्यवस्था, नशा तस्करी और युवाओं को बचाने के बजाय राजनीतिक छवि प्रबंधन में लगा हुआ है, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा