हिसार में बिजली कर्मचारियों का धरना, 300 से अधिक सब डिवीजनों में लाइसेंस की प्रतियां जलाने की घोषणा

 


बिजली के निजीकरण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे कर्मचारी, 22 से 24 अक्टूबर

तक हड़ताल का ऐलान

हिसार, 20 अक्टूबर (हि.स.)। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर

बिजली वितरण लाइसेंस देने के फैसले के खिलाफ हरियाणा में बिजली कर्मचारियों का विरोध

तेज हो गया है। हिसार में बिजली कर्मचारियों ने मंगलवार काे धरना देकर सरकार के फैसले के खिलाफ

आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया।

ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी ने 22

से 24 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी हड़ताल करने की घोषणा करते हुए कहा कि जब तक निजी कंपनी

इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

कर्मचारियों ने दशहरे के दिन प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों और सर्कल कार्यालयों पर

प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और हरियाणा विद्युत

विनियामक आयोग (एचईआरसी) के चेयरमैन के पुतले फूंकने का भी ऐलान किया है।

धरने के दौरान सुरेश राठी ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस

देना सार्वजनिक बिजली व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि

सरकार बिजली वितरण क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाकर हरियाणा को प्रयोगशाला

बना रही है। बिजली वितरण निगमों के अधिकार निजी कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया से कर्मचारियों

और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित होने की आशंका है। यूनियन इस फैसले को किसी भी सूरत

में स्वीकार नहीं करेगी और इसके विरोध में बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, किसान तथा मजदूर

एकजुट होकर आंदोलन करेंगे।

सुरेश राठी ने बताया कि 21 अक्टूबर को प्रदेश की 300 से अधिक सब डिवीजनों में

बिजली कर्मचारी एकत्रित होकर सरकार की ओर से जारी पत्र और लाइसेंस के मसौदे की प्रतियां

जलाएंगे। इस विरोध प्रदर्शन में बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों और विभिन्न कर्मचारी

संगठनों के शामिल होने की संभावना है। राज्य प्रधान ने घोषणा की कि 22, 23 और 24 अक्टूबर को प्रदेश के बिजली कर्मचारी

हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त कार्रवाई

समिति के माध्यम से आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। राठी के अनुसार, अभी तक सरकार की ओर

से बातचीत के लिए कोई बुलावा नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों

की मांग पर विचार नहीं किया और लाइसेंस रद्द नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज करते हुए

जनता के बीच ले जाया जाएगा। उन्होंने दशहरे पर पुतला दहन और सब डिवीजनों में लाइसेंस

की प्रतियां जलाने के कार्यक्रम को निजीकरण के खिलाफ संघर्ष का हिस्सा बताया। यूनियन

ने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने और सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के हितों

की रक्षा करने की मांग की है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर