हिसार : राखी गढ़ी के टीले में मिले प्राचीन जलधारा के स्रोत
टीले एक पर मिला
बड़ा स्टोरेज जार का बंद मुंह खोलेगा हजारों साल पुराने राज
हिसार, 04 मई (हि.स.)।
राखी गढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की संरचना जांचने के टीलों के किनारों पर खुदाई
की जा रही हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को इसमें काफी हद तक कामयाबी भी मिल
रही हैं। टीलों के बीच में
जलधारा होने के प्रमाण टीलें नंबर एक पर छह मीटर की गहराई तक खुदाई में मिलें हैं।
कुछ ही दूरी पर एक मकान में बड़ा स्टोरेज जार भी मिला जिसका मुंह एक छोटे बर्तन की
सहायता से बंद किया हुआ है। अंदाज़ा लगाया जा रहा हैं कि इसके अंदर कोई कीमती चीज ही
होगी लेकिन इसका मुंह खुलने के बाद ही राजफाश होगा।
राखी गढ़ी हड़प्पा
कालीन सभ्यता का बड़ा मेगा सिटी शहर होता था जो कि सरस्वती नदी के किनारे पर बसा हुआ
था। टीले एक और तीन के बीच कोई नदी गुजरती थी। इसके प्रमाण की परतें हटती जा रही हैं।
टीले नंबर एक पर छह मीटर की गहराई तक खुदाई की गई तो उसके नीचे रेतीली मिट्टी मिली
है। इससे अनुमान लगाया जा रहा हैं कि या तो यहां से कोई नदी गुजरती होगी या फिर कोई
तालाब भी ही सकता हैं। यहां पानी बहने के साथ्-साथ मृदभांड के टुकड़े भी मिल रहे हैं।
शोधकर्ता अब और ज्यादा गहराई तक खुदाई करने का रोडमैप तैयार कर रहे हैं ताकि आगे की
कड़ियां जुड़ सके।
टीले नंबर एक पर
ही एक बड़ा मिट्टी का बना हुआ स्टोरेज जार मिला है जिसका मुंह मिट्टी के बर्तन से बंद
किया हुआ है। शोधकर्ताओं का अंदाजा है कि इसमें कोई कीमती चीज या फिर अनाज हो सकता
है। इसमें करीब डेढ़ सौ किलो अनाज स्टोरेज हो सकता है। अब तक की खुदाई में इतना बड़ा
मिट्टी का स्टोरेज जार नहीं मिला था। साथ में कुछ अन्य मिट्टी के बर्तन, हड्डियों के
टुकड़े, कच्ची ईंटों की दीवारें भी मिली है। इस सामान की टीएल डेटिंग करवाने के दिल्ली
में भेजा जाएगा कि सामान कितने साल पुराना हैं।
मनोज सक्सेना अधीक्षण
पुरातत्वविद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय ग्रेटर नोएडा ने साेमवार काे बताया
कि जल के स्रोत मिलना काफी बड़ी उपलब्धि है। पता चल जाएगा की नदी या कोई बड़ा तालाब
था। इसका पानी उपयोग वो लोग करते होंगे अभी छह मीटर तक की गहराई तक खुदाई की है। तीन
चार मीटर ओर गहराई तक खुदाई की जाएगी जो कि काफी अहम होगी। बड़ा स्टोरेज जार का मुंह
बंद है, इसको खोलने पर पता चल सकेगा कि इसके अंदर क्या है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर