अम्बाला का शहीद स्मारक बनकर तैयार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द करेंगे उद्घाटन : अनिल विज

 


-800 करोड़ रुपये की लागत से बना स्मारक, 23 गैलरियों में दिखेगा 1857 की क्रांति का इतिहास-360 डिग्री प्रोजेक्शन, साउंड-लेजर शो और 2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर

चंडीगढ़, 13 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि अम्बाला छावनी में 800 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ पूरी तरह तैयार हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जल्द ही एशिया के इस सबसे बड़े शहीद स्मारक का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

अनिल विज मंगलवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह स्मारक केवल अम्बाला या हरियाणा का नहीं, बल्कि पूरे देश का राष्ट्रीय स्मारक है। यह 1857 की क्रांति के उन वीरों के बलिदान को समर्पित है, जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया।

अनिल विज ने कहा कि आजादी की लड़ाई में जिस भी व्यक्ति ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया, वे उन सभी वीरों को नमन करते हैं। उस दौर में ब्रिटिश साम्राज्य का दुनिया के बड़े हिस्से पर विस्तार था, लेकिन भारत के किसानों, जवानों, महिलाओं और बच्चों सहित असंख्य देशवासियों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इन सभी के योगदान को सम्मान देना हमारा कर्तव्य है।

विज ने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में अक्सर यह पढ़ाया गया कि देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ए.ओ. ह्यूम ने वर्ष 1885 में की थी। उन्होंने कहा कि इससे 28 वर्ष पहले, 1857 में देशभर में अंग्रेजी शासन के खिलाफ व्यापक सशस्त्र संघर्ष हुआ था। इसके बावजूद इस संघर्ष में शामिल अनेक वीरों की गाथाएं और उनके बलिदान लंबे समय तक लोगों के सामने नहीं आ सके।

2014 में शहीद स्मारक बनाने की पहल की

अनिल विज ने बताया कि वर्ष 2014 में हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष इस विषय से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए और अम्बाला छावनी में शहीद स्मारक स्थापित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 1857 के संघर्ष में अम्बाला की भूमिका और शुरुआती घटनाक्रम को सामने लाना जरूरी था, ताकि इस ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।

मंत्री विज ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. के.सी. यादव ने अपने शोध में अम्बाला छावनी में 1857 के संघर्ष के शुरुआती घटनाक्रम का उल्लेख किया था। इसके अलावा, अन्य स्रोतों से भी ऐतिहासिक जानकारी और दस्तावेज जुटाए गए। स्मारक में अम्बाला, हरियाणा और देश के विभिन्न क्षेत्रों में हुए संघर्षों का इतिहास प्रदर्शित किया गया है। इस विषय पर एक कॉफी टेबल बुक भी तैयार की जा रही है।

विज ने कहा कि 1857 का संघर्ष व्यापक स्तर पर फैला था। उस समय कमल के फूल और रोटी के माध्यम से संदेश पहुंचाए जाने का उल्लेख मिलता है। स्मारक में इसी ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देश के विभिन्न क्षेत्रों में हुए घटनाक्रमों को स्थान दिया गया है।

23 गैलरियों में दिखेगा देशभर की क्रांति का इतिहास

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि स्मारक में कुल 23 गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें अम्बाला, हरियाणा, मेरठ, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, झांसी और देश के अन्य क्षेत्रों में वर्ष 1857 के संघर्ष को दर्शाया गया है। इन गैलरियों के माध्यम से आगंतुकों को उस दौर की घटनाओं, क्रांतिकारियों के संघर्ष और उनके बलिदान की जानकारी मिलेगी।

उन्होंने बताया कि स्मारक में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यहां 360 डिग्री प्रोजेक्शन की व्यवस्था है, जिससे आगंतुकों को ऐसा अनुभव कराने का प्रयास किया गया है, मानो वे स्वयं क्रांतिकारियों के बीच खड़े होकर उस ऐतिहासिक दौर को करीब से देख रहे हों। परिसर में साउंड और लेजर शो भी आयोजित किए जाएंगे।

2,500 दर्शकों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर

विज ने बताया कि स्मारक परिसर में 2,500 लोगों की बैठने की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया गया है। इसके अलावा, 300 लोगों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम भी स्थापित किया गया है। पूरे स्मारक को विस्तार से देखने में लगभग छह घंटे लग सकते हैं। आगंतुकों की सुविधा के लिए 40-40 लोगों के समूह में भ्रमण कराने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि स्मारक में एक बड़ी लिफ्ट भी लगाई गई है, जिसके माध्यम से एक बार में 40 लोग पहली मंजिल से दूसरी मंजिल तक जा सकेंगे। इस दौरान वे इतिहास और क्रांतिकारी वीरों से संबंधित प्रदर्शनों को देख सकेंगे।

63 मीटर ऊंची कमलाकार संरचना, शीर्ष पर बनेगा स्काई कैफे

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि स्मारक में कमल के फूल के आकार की 63 मीटर ऊंची संरचना बनाई गई है। इसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं। इसके शीर्ष पर स्काई कैफे भी विकसित किया जा रहा है। परिसर में एक हेलीपैड भी बनाया गया है।

विज ने उम्मीद जताई कि इस ऐतिहासिक स्मारक को देखने के लिए देश-प्रदेश के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग अम्बाला पहुंचेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा