अंबाला जेल में कामयाब हुई ‘फोनबंदी’ तकनीक
पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद प्रदेश सभी जेलों में लगेंगे टावर
जैमर के बजाय टावर आधारित प्रणाली से अवैध मोबाइल पर शिकंजा
चंडीगढ़, 06 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा की जेलों में कैदियों के अवैध मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए शुरू किया गया हाईटेक प्रयोग कामयाब रहा है। प्रदेश के जेल एवं निर्वाचन मंत्री डॉ.अरविंद शर्मा ने रविवार को चंडीगढ़ में जारी जानकारी में बताया कि जेलों को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जा रहा है। अंबाला जेल में शुरू किया गया टावर हार्मोनिक्स कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफल रहा है। इसके सकारात्मक परिणामों के आधार पर प्रदेश की अन्य जेलों में भी इस व्यवस्था को लागू करने पर विचार किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि इस तकनीक की खासियत यह है कि इसके लिए पारंपरिक मोबाइल जैमर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। जेल परिसर में विशेष टावर लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से वहां मौजूद मोबाइल फोन को लक्षित तरीके से नियंत्रित किया जाता है। इससे जेल परिसर में मोबाइल नेटवर्क को पूरी तरह बाधित किए बिना अवैध फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है।
जेल विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अंबाला जेल को इस तकनीक के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना था। यहां तकनीक की कार्यप्रणाली, नेटवर्क कवरेज और अवैध मोबाइल के इस्तेमाल को रोकने की क्षमता का परीक्षण किया गया। पायलट के परिणाम संतोषजनक रहने के बाद अब प्रदेश की अन्य जेलों में भी इसे लगाने पर विचार किया जा रहा है।
टावर आधारित प्रणाली में अवैध मोबाइल फोन जेल परिसर में मौजूद विशेष टावर से जुड़ सकता है, लेकिन उसकी कॉल और इंटरनेट सेवाओं को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में कैदी मोबाइल फोन अपने पास रखने के बावजूद उसका इस्तेमाल सामान्य संचार के लिए नहीं कर पाएंगे। इस व्यवस्था से जेल प्रशासन को मोबाइल फोन के जरिये जेल से बाहर होने वाले अनधिकृत संपर्क पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा