हिसार में आर्य समाज की संस्थाओं में करोड़ाें का घाेटाला: सुभाष चंद्रा

 


प्रशासक नियुक्त नहीं हुआ तो 24 से प्रदेशव्यापी आंदोलन: डॉ. सुभाष चंद्रा

हिसार, 20 जुलाई (हि.स.)। पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुभाष चंद्रा ने आर्य समाज

हिसार की ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थाओं में 700 से 800 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार

का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि 23 जुलाई तक सरकार द्वारा संस्था के लिए

प्रशासक नियुक्त नहीं किया गया तो 24 जुलाई से पूरे हरियाणा में जन आंदोलन शुरू किया

जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को गुमराह कर मामले की जांच प्रभावित करने

का भी आरोप लगाया।

डॉ. सुभाष चंद्रा ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आर्य समाज ने

समाज सुधार, शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और वैदिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार में ऐतिहासिक

योगदान दिया है। हिसार का 108 वर्ष पुराना आर्य समाज स्कूल इसकी सबसे बड़ी पहचान है,

जिसने देश को 48 से अधिक आईएएस अधिकारी सहित अनेक प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी दिए हैं।

इस ऐतिहासिक धरोहर को किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

सुभाष चन्द्रा ने आरोप लगाया कि संस्था के पास कभी लगभग 450 दुकानें हैं, जिनके

किराए से स्कूल का संचालन होता था और गरीब बच्चों को बेहद कम फीस पर गुणवत्तापूर्ण

शिक्षा मिलती थी लेकिन आज इन दुकानों के संचालन में ही करीब 50 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार

सालाना हो रहा है। इसके अलावा संस्था की कई मूल्यवान जमीनें भी अवैध रूप से बेची गई

हैं, जिससे पिछले 40 सालों में पूरे घोटाले

का आकार 700 से 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

डॉ. चंद्रा ने कहा कि घोटाले में शामिल लोगों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

को गलत और भ्रामक जानकारी देकर गुमराह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से

हिसार प्रशासन को फोन करवाया गया, जिसके बाद प्रशासन इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई

नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि जिस संस्था को समाज के सभी वर्गों ने मिलकर खड़ा किया

था, उसे कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए बर्बाद करने में लगे हैं। उन्होंने सरकार को

23 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि तब तक आर्य समाज हिसार और उसकी संस्थाओं

के लिए प्रशासक नियुक्त नहीं किया गया तो 24 जुलाई से प्रदेशव्यापी जन आंदोलन शुरू

किया जाएगा।

इस आंदोलन में वर्तमान और पूर्व विद्यार्थियों के अभिभावक भी शामिल होंगे। डॉ. चंद्रा ने आंदोलन की प्रमुख मांगों में तत्काल प्रशासक की नियुक्ति, संस्था

में नया सदस्यता अभियान चलाना, आर्य समाज और स्वामी दयानंद सरस्वती की विचारधारा से

जुड़े लोगों को संस्था से जोड़ना तथा वर्तमान व्यवस्था को समाप्त कर नई कमेटी का गठन

करना शामिल बताया। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि

हिसार की ऐतिहासिक धरोहर, आर्य समाज की प्रतिष्ठा और गरीब विद्यार्थियों के भविष्य

को बचाने के लिए है। इस अवसर पर पूर्व सरपंच सोमेश ने भी कहा कि यह आर्य समाज के अस्तित्व

और सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 23 जुलाई तक प्रशासन ने आवश्यक

कदम नहीं उठाए तो 24 जुलाई से आंदोलन होगा और जरूरत पड़ी तो अनशन भी शुरू किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर