जींद: आर्थिक तंगी को पछाड़ किसान की बेटी नीरू ने एशियन गेम्स में जीता स्वर्ण पदक

 






-गांव संगतपुरा में जश्न का माहौल, परिजनों ने मिठाई खिला खुशी का किया इजहार

जींद, 29 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा के जींद जिले के एक छोटे से गांव संगतपुरा की बेटी नीरू ढांडा ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर जापान में चल रहे 20वें एशियाई खेलों में महिला ट्रैप शूटिंग की व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम पूरे विश्व में रोशन किया है। नीरू के गोल्ड जीतने का समाचार मिलते ही परिजन खुशी से झूम उठे। बेटी के स्वर्ण पदक जीतने पर पिता सुरेश कुमार और माता सुदेश की आंखें हो गईं। लगभग 2500 की आबादी वाले गांव संगतपुरा के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली नीरू की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद परिवार और पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

पड़ोसियों ने नीरू के घर पहुंचकर बेटी की इस उपलब्धि पर बधाई दी और खुशी का इजहार किया। माता सुदेश देवी ने कहा कि हमारी बेटी ने पूरे देश का मान बढ़ाया है। हमारा अगला सपना है कि नीरू ओलंपिक में भी देश के लिए गोल्ड मेडल जीत कर लाए। उन्होंने बताया कि बेटी जब घर लौटेगी, तो उसका स्वागत उसकी पसंदीदा चीजें देसी टिंडी घी और चूरमा खिलाकर किया जाएगा। पिता सुरेश ढांडा ने कहा कि नीरू को बचपन से ही देसी टिंडी घी और चूरमा बहुत पसंद है। उसने अपनी मेहनत से साबित कर दिया कि अगर इरादे बुलंद हों तो कोई भी रुकावट आपको सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती है।

पिता सुरेश ढांडा ने बताया कि नीरू का सफर संघर्षों से भरा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पास खुद की राइफल तक नहीं थी। नीरू ने दूसरों की राइफल मांगकर निशानेबाजी की बारीकियां सीखीं। परिवार के पास महज तीन एकड़ जमीन है, जिससे खेतीबाड़ी कर पिता परिवार का पालन व पोषण करते हैं। परिवार के कम पढ़े, लिखे होने और आर्थिक तंगी के कारण सामाजिक कार्यकर्ता सोमबीर पहलवान ने हर कदम पर इस प्रतिभावान खिलाड़ी और उनके परिवार का साथ दिया। नीरू को शुरुआत में कबड्डी के खेल में रुचि थी लेकिन वहां अपेक्षित सफलता न मिलने पर उन्होंने निशानेबाजी का रुख किया।

गांव के स्कूल से पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने केवीएस से 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की और साथ ही निशानेबाजी का अभ्यास भी जारी रखा। 10वीं के बाद नीरू ने भोपाल स्थित शूटिंग अकादमी में दाखिला लिया, जहां अपनी दिन-रात की मेहनत और प्रतिभा के बल पर उन्होंने पदक जीतने का सिलसिला शुरू किया। गोल्ड मेडल जीतने की खबर मिलते ही नीरू के घर पर बधाइयों का तांता लग गया है। परिजनों और ग्रामीणों को अब नीरू के घर लौटने का बेसब्री से इंतजार है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा