नूंह पुलिस मुठभेड़ में शाहिद उर्फ आडवाणी की मौत, धरने पर बैठे ग्रामीण
नूंह, 15 अक्टूबर (हि.स.)। नूंह पुलिस के साथ मुठभेड़ में कुख्यात अपराधी शाहिद उर्फ आडवाणी की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर पुलिस के अनुसार, शाहिद के खिलाफ हरियाणा और राजस्थान में गौकशी, चोरी, लूट, डकैती, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म और पुलिस पर जानलेवा हमला सहित करीब 41 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। वहीं, दूसरी ओर मृतक के परिजनों और गांव के लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और इंसाफ की मांग की है। शाहिद की मौत के बाद गुरुवार काे ग्रामीण मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठ गए।
पुलिस के अनुसार, शाहिद उर्फ आडवाणी निवासी खरखड़ी, थाना सदर तावडू, आपराधिक मामलों में वांछित था। उसके खिलाफ पुलिस पर फायरिंग और जानलेवा हमले सहित कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब उसके गैंग और उसे समर्थन देने वाले लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रख रही है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मृतक शाहिद उर्फ आडवाणी के भाई वाहिद ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके भाई के खिलाफ कुछ छोटे-मोटे मुकदमे दर्ज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पुलिस अधिकारी की कार्रवाई में उनके भाई की मौत हुई, उसकी मंशा और संभावित रंजिश की जांच होनी चाहिए। वाहिद ने दावा किया कि इससे पहले भी घुसपैठी गांव में उनके भाई को मारने का प्रयास किया गया था, लेकिन ग्रामीणों के एकत्र होने के कारण ऐसा नहीं हो सका।
वाहिद के मुताबिक, शाहिद अपने दो साथियों के साथ थार गाड़ी में किसी से मिलने जा रहा था। पुलिस दिखाई देने पर वह भागने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का उद्देश्य उसे गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि मुठभेड़ में मारना था। हालांकि, ये आरोप मृतक के परिजनों की ओर से लगाए गए हैं।
वाहिद ने कहा कि यदि उनका भाई अपराधी था, तो उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाना चाहिए था और दोष साबित होने पर कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस उसे पकड़ना चाहती थी, तो पैर में गोली मारकर काबू करने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार, शाहिद को पांच गोलियां मारी गईं, जिनमें सीने पर लगी गोलियां भी शामिल थीं। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गांव के सरपंच अशफाक ने कहा कि शाहिद उर्फ आडवाणी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे, लेकिन पुलिस को उसे मुठभेड़ में मारने के बजाय गिरफ्तार कर अदालत में पेश करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून के तहत होनी चाहिए और दोष साबित होने पर अदालत से सजा मिलनी चाहिए। फिलहाल, इस मामले में पुलिस का अधीक्षक डॉ अर्पित जैन ने कहा कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि आडवाणी उर्फ शाहिद पर हरियाणा-राजस्थान में 41 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया