जींद : हर बच्चे तक पहुंचेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अगस्त से शुरू होगा कैच-अप शिक्षण कार्यक्रम
जींद, 25 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन की मूल भावना को धरातल पर उतारने की दिशा में शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में एक महत्वाकांक्षी कैच अप शिक्षण कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है। यह कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए संजीवनी साबित होगा जो विभिन्न कारणों से अपनी कक्षा के अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। विभाग का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा उसकी सीखने की क्षमता (लर्निंग लेवल ) के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करे और कोई भी विद्यार्थी अधिगम की दौड़ में पीछे न रह जाए।
बीते वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अधिगम आकलनों, स्कूल आधारित मूल्यांकनों तथा कक्षा शिक्षण के अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि एक ही कक्षा में पढऩे वाले सभी बच्चों का सीखने का स्तर समान नहीं होता। कुछ विद्यार्थी भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं में अपेक्षित स्तर से पीछे रह जाते हैं। यदि समय रहते इस अंतर को दूर नहीं किया जाए तो यह आगे चलकर लर्निंग गैप का रूप ले लेता है। यही अंतर बाद में बच्चों की पढ़ाई, आत्मविश्वास और भविष्य की सफलता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक एक विस्तृत और समयबद्ध कैच-अप कार्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें प्रत्येक बच्चे की सीखने की आवश्यकता के अनुसार विशेष शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के पहले चरण में अगस्त 2026 के दौरान सभी सरकारी विद्यालयों में 15 दिवसीय विशेष पुनरावृत्ति अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों की भाषा, पठन, लेखन तथा बुनियादी गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों द्वारा बच्चों की वर्तमान सीखने की स्थिति का आकलन कर उनकी आवश्यकताओं के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने बताया कि शिक्षा विभाग ने इस कार्यक्रम को केवल एक अभियान तक सीमित नहीं रखा है। अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक विद्यालयों के नियमित टाइम-टेबल में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का कैच-अप सत्र शामिल किया जाएगा। यह अतिरिक्त समय विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए होगा। जिन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। शिक्षक प्रत्येक सप्ताह फॉर्मेटिव असेसमेंट करेंगे और उसी आधार पर यह तय करेंगे कि किन बच्चों को विशेष सहायता की आवश्यकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा