‘दिल्ली सेमीकंडक्टर नीति’ का ड्राफ्ट बनना शुरू : रेखा गुप्ता

 




नई दिल्ली, 19 अप्रैल (हि.स.)।

दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली सेमीकंडक्टर नीति’ का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस नीति का उद्देश्य दिल्ली को सेमीकंडक्टर डिजाइन, उन्नत अनुसंधान एवं विकास तथा असेंबली गतिविधियों के लिए एक सक्षम केंद्र के रूप में विकसित करना है। यह जानकारी रविवार को एक विज्ञप्ति के जरिए दी गई है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह पहल राजधानी में उच्च मूल्य वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो देश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास में दिल्ली की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है और दिल्ली सरकार इसके संतुलित एवं व्यवस्थित विकास के लिए एक समग्र नीति ढांचा तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह नीति कारोबार सुगमता, नवाचार और उद्योग आधारित इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों प्रकार के प्रोत्साहनों का प्रावधान करती है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रस्तावित नीति पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें सेमीकंडक्टर डिजाइन और बौद्धिक संपदा विकास, अनुसंधान, विकास और नवाचार, विनिर्माण को सक्षम बनाने वाली गतिविधियां जैसे असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) तथा आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्टिंग (ओएसएटी) के साथ सहायक उद्योगों का विकास, टैलेंट डेवलपमेंट एवं स्किलिंग, तथा स्टार्टअप और औद्योगिक इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति से सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास और एडवांस पैकेजिंग में दिल्ली की स्थिति मजबूत होगी। इससे फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनियों, स्टार्टअप्स तथा एटीएमपी और ओएसएटी इकाइयों में निवेश आकर्षित होने की संभावना है। इसके साथ ही परीक्षण, पैकेजिंग और सेमीकंडक्टर इनपुट से जुड़े सहायक उद्योगों के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर अनुसंधान और उन्नत पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर सृजित करेगी। इसके साथ ही लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, इंटर्नशिप और उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी के माध्यम से कौशल विकास को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल कुशल पेशेवरों को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने में सहायक होगी, जिससे दिल्ली को एक ज्ञान और नवाचार केंद्र के रूप में और सुदृढ़ किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री कहा कि नीति के माध्यम से निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए लक्षित प्रोत्साहन, परिचालन लागत में कमी और अनुकूल व्यावसायिक वातावरण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है। पूंजीगत सब्सिडी, आधारभूत संरचना विकास और राष्ट्रीय पहलों, विशेष रूप से इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के साथ समन्वय स्थापित कर निवेशकों के विश्वास को सुदृढ़ किया जाएगा तथा घरेलू और वैश्विक निवेशकों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव