सीएजी रिपोर्ट ने वर्षों की जल प्रबंधन एवं यमुना सफाई की विफलताओं को किया उजागर : प्रवेश साहिब सिंह
नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा में सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान आज कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने जल प्रबंधन, सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर और यमुना सफाई में वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत विफलताओं को उजागर किया है। उन्होंने अपनी सरकार की जल प्रबंधन औ यमुना की सफाई की एक व्यापक और समयबद्ध सुधार योजना सदन में प्रस्तुत की।
मंत्री ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पानी, सीवर और स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याएं उठाईं—जो सीधे तौर पर जनता की परेशानियों को दर्शाती हैं। हालांकि, उन्होंने इस महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान विपक्ष की अनुपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन्हें जनता की आवाज उठाने के लिए चुना गया, उन्होंने ही सदन से बाहर जाना उचित समझा। जब पानी, सीवर, यमुना और भ्रष्टाचार पर जवाब देने का समय आया, तो उन्होंने जवाबदेही की जगह चुप्पी चुनी।
स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मंत्री ने सीएजी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु बताते हुए कहा कि इसमें जल मांग और सीवेज ट्रीटमेंट के लिए वैज्ञानिक योजना का अभाव, 200 एमजीडी से अधिक बिना उपचारित सीवेज सीधे यमुना में प्रवाहित, 1000 से अधिक कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का अभाव, कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर्यावरण मानकों पर खरे नहीं, फीकल कंटैमिनेशन की प्रभावी निगरानी का अभाव, नॉन-रेवेन्यू वाटर लॉस 45–53 फीसद तक, जनसंख्या वृद्धि के अनुसार सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार नहीं हुआ।
मंत्री ने स्पष्ट कहा,ये आरोप नहीं हैं, बल्कि सीएजी द्वारा दर्ज तथ्य हैं। जल संकट : मांग, आपूर्ति और प्रबंधन के बीच अंतर है। दिल्ली में वर्तमान में लगभग 1200 एमजीडी पानी की आवश्यकता है, जबकि आपूर्ति लगभग 1000 एमजीडी है, जिससे लगातार कमी बनी हुई है।
मंत्री ने कहा कि केवल आपूर्ति की कमी ही नहीं, बल्कि खराब प्रबंधन और भारी ट्रांसमिशन लॉस ने संकट को और गहरा किया है। उन्होंने यमुना को दिल्ली की आस्था और पहचान का प्रतीक बताते हुए इसे पुनर्जीवित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यमुना के प्रदूषित दिखने का सबसे बड़ा कारण बिना उपचारित सीवेज है। यदि इसे रोक दिया जाए, तो यमुना खुद ही साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2 से 2.5 वर्षों में दिल्ली में सीवेज उत्पादन से अधिक ट्रीटमेंट क्षमता उपलब्ध होगी।
मंत्री ने बताया कि अभी भी लगभग 20 लाख घर सीवर नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं। इसे दूर करने के लिए 400 से अधिक कॉलोनियों में सीवर कार्य शुरू, सभी 1799 अनधिकृत कॉलोनियों को कवर करने का लक्ष्य, पिछले एक वर्ष में 180 किमी से अधिक नई सीवर लाइन बिछाई गई, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर का उन्नयन और प्रतिस्थापन किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सेप्टिक टैंक माफिया व्यवस्था को समाप्त किया जा रहा है, जहां कचरा अक्सर ट्रीटमेंट प्लांट की बजाय नालों में डाला जाता था।
मंत्री ने कहा कि अब दिल्ली जल बोर्ड एक केंद्रीकृत और पारदर्शी प्रणाली विकसित कर रहा है, जिसमें अपने टैंकर और डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म शामिल होंगे, जिससे सीवेज का सही निपटान सुनिश्चित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव