भारतेंदु हरिश्चंद्र के ‘नीलदेवी’ नाटक में नारी सशक्तीकरण और राष्ट्र चेतना की अभिव्यक्ति

 


नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (हि.स.)। इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती, मध्य साहित्य केंद्र की ओर से शनिवार को प्रवासी भवन में भारतेंदु हरिश्चंद्र कृत ‘नीलदेवी’ नाट्य पुस्तक पर चर्चा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने नाटक के माध्यम से नारी सशक्तीकरण, राष्ट्र चेतना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जागृत करने में भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में लेखक संजीव त्रिपाठी ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित ‘नीलदेवी’ नाटक भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने का सशक्त माध्यम है। नाटक की नायिका नीलदेवी, राजा सूर्यदेव की रानी हैं। भारतेंदु ने उनके चरित्र के माध्यम से संयमी, साहसी, विवेकशील और सशक्त नारी का आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि यह नाटक उस समय लिखा गया था, जब भारत अंग्रेजों के अधीन था। भारतेंदु अपनी लेखनी के माध्यम से देशवासियों को भविष्य के प्रति सचेत कर रहे थे।

युवा लेखक अंकित कुमार दूबे ने कहा कि ‘नीलदेवी’ नाटक ने पराधीन भारत में लोगों को प्रेरणा देने का कार्य किया। यह नाटक ऐतिहासिक भले ही न हो, लेकिन इसकी घटनाएं राष्ट्रीय चेतना को प्रखर करती हैं। इसमें नवजागरण की सामान्य विशेषताएं समाहित हैं। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इस नाटक के माध्यम से भारतीय नारी के आदर्श और प्रतिरोध की भावना को प्रस्तुत किया। नाटक ने महिलाओं को अपनी स्थिति पहचानने और उससे बाहर निकलने का संदेश दिया।

नाटककार एस.पी. सिंह सेंगर ने कहा कि नाटक एक अत्यंत प्रभावशाली और जीवंत दृश्य-श्रव्य माध्यम है, जिसका प्रभाव तत्काल पड़ता है। ‘नीलदेवी’ नाटक ने नारी सशक्तीकरण के माध्यम से समाज को प्रगतिशील बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र ने अपनी लेखनी को हथियार बनाकर स्वतंत्रता सेनानी की भूमिका निभाई।

लेखिका गुंजन शर्मा ने गत शरद पूर्णिमा के अवसर पर महर्षि वाल्मीकि जयंती का उल्लेख करते हुए वाल्मीकि द्वारा रचित दस श्लोकों को उद्धृत किया और उन पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण महाकाव्य की रचना कर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र के माध्यम से समाज को धर्म और सदाचार का मार्ग दिखाया।

कार्यक्रम के अंत में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में उनके योगदान का स्मरण किया गया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा सहित चन्दन कुमार, पवन प्रत्युष, विकास आनंद एवं आलोक रंजन ने भी सहभागिता की।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी