दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू : सिरसा

 


नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली में वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण, यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। पर्यावरण विभाग द्वारा लागू प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा करते हुए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठा रही है।

मंत्री सिरसा ने बताया कि नीति आयोग और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लगभग 30 एजेंसियां 11-सूत्रीय प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत काम कर रही हैं। सरकार प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ यातायात प्रबंधन, धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी और हरित क्षेत्र के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। उल्लेखनीय है कि आज से दिल्ली में एनसीआर में ग्रैप-1 लागू किया गया है।

सिरसा ने स्पष्ट कहा कि दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) संबंधी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। उन्होंने वाहन चालकों से अपील करते हुए कहा, बिना पीयूसी प्रमाणपत्र के दिल्ली मत आइएगा। गाड़ी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है और आपको जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के सभी ईंधन स्टेशनों को ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नियम का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

सिरसा ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर से दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों पर भी नजर रखी जा रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो और दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

सरकार की घोषित कार्ययोजना के मुताबिक, 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर से आने वाले बीएस-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रावधान है। इसमें निर्धारित श्रेणियों के वाहनों और आवश्यक सेवाओं को नियमानुसार छूट दी जाएगी।

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ यातायात जाम की समस्या को दूर करने के लिए भी सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आज भी दो-तीन स्थानों की पहचान की गई है, जहां यातायात की स्थिति का आकलन करने के लिए वे स्वयं पहुंचे।

सिरसा ने कहा कि इन स्थानों का दौरा करने का उद्देश्य यह समझना था कि यातायात को किस प्रकार सुगम बनाया जा सकता है और वाहनों की आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। संबंधित स्थानों पर यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक उपायों पर काम किया जाएगा, ताकि जाम से होने वाली परेशानी कम हो और वाहनों से होने वाले अतिरिक्त उत्सर्जन पर भी अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों की शिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। सभी वार्डों में तैनात निगरानी वाहनों और तकनीक की मदद से प्रदूषण संबंधी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

सिरसा ने कहा कि 311 ऐप पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए मॉनिटरिंग टीमों की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो सके। खुले में कूड़ा या पत्तियां जलाने, धूल नियंत्रण के नियमों के उल्लंघन और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों से संबंधित शिकायतों पर संबंधित एजेंसियों के माध्यम से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

दिल्ली सरकार प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी और प्रवर्तन को मजबूत कर रही है। चिह्नित बड़े निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन और विभिन्न हॉटस्पॉट पर मिस्ट स्प्रे यूनिट्स लगाई गई हैं। दिल्ली में 283 कंस्ट्रक्शन साइट पर 608 एंटी स्मोग गन लगाए गए हैं इसके साथ ही लगभग 200 हाई राइज बिल्डिंग पर भी एंटी स्मोग गन लगाए गए हैं साथ ही 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर भी सड़कों पर तैनात किया गया है! 3,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले परिसरों में निर्धारित मानकों के अनुसार एंटी-स्मॉग गन एवं मिस्ट सिस्टम की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।

सरकार की कार्ययोजना में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक बाहरी निर्माण एवं ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर प्रस्तावित रोक, खुले में कचरा जलाने पर प्रतिबंध, निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क में वृद्धि तथा कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम जैसे उपाय भी शामिल हैं। इन उपायों का क्रियान्वयन लागू आदेशों और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि दिल्ली में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। 70 लाख पौधों के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले कुल 78 लाख पौधे लगाए गए हैं। वन विभाग द्वारा पौधारोपण की जियो-टैगिंग की गई है और पौधों की उत्तरजीविता दर 96 से 97 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है। इसके साथ ही दिल्ली क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाएं शून्य दर्ज की गई हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव