युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए : रविंद्र इंद्राज सिंह
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ विभाजनकारी विचारों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने यह विचार बुधवार को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती के उपलक्ष्य पर अदिति कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं डॉ. अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह के साथ-साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के चीफ विजिलेंस ऑफिसर प्रो. गजेंद्र सिंह, दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क के विभागाध्यक्ष प्रो. संजय रॉय, महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीलम राठी उपस्थित रहीं।
मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह ने कहा कि बाबा साहेब के विचारों और संघर्षों का समुचित अध्ययन आज भी समाज में व्यापक रूप से नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए अपने जीवन को महान बनाया और देश को एक मजबूत संवैधानिक आधार प्रदान किया। उन्होंने सभी से संविधान और बाबा साहेब के विचारों का गंभीर अध्ययन करने का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि “शिक्षित बनो, संघर्ष करो और संगठित रहो” का संदेश किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए है। उन्होंने ‘जय भीम’ के वास्तविक अर्थ को समरसता, समानता और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि समाज को विभाजनकारी सोच से ऊपर उठकर एकजुटता की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि आज का भारत जिस सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है, उसका आधार संविधान है। युवाओं से उन्होंने आह्वान किया कि वे संविधान को पढ़ें, समझें और अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनें।
इस अवसर पर कॉलेज प्रशासन से मंत्री ने अनुरोध किया कि विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से संविधान अध्ययन के विशेष सत्र आयोजित किए जाएं, ताकि युवा पीढ़ी अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक हो सके।
मंत्री इंद्राज ने नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं का सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी, विशेष रूप से छात्राएं, सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की धुरी बन सकती हैं, इसलिए उन्हें हर संभव अवसर और समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने नारी शक्ति, समानता और सामाजिक जागरूकता के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव