ऐतिहासिक उपन्यास लिखना एक चुनौती है - विश्वास पाटील

 


नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। विश्व पुस्तक मेला में शुक्रवार को साहित्य अकादेमी ने ‘लेखक मंच’ पर ‘आमने-सामने’ और ‘बहुभाषी कहानी-पाठ‘ कार्यक्रम आयोजित किए गए। ‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत दो लेखकों - कुलदीप सिंह दीप (पंजाबी) और विश्वास पाटील (मराठी) ने श्रोताओं के समक्ष अपनी रचना-प्रक्रिया साझा की, साथ ही अपनी रचनाओं का पाठ भी किया। ‘बहुभाषी कहानी-पाठ’ कार्यक्रम में हिंदी के प्रख्यात लेखक ज्ञान प्रकाश विवेक, ओड़िआ की प्रख्यात लेखिका प्रतिभा शतपथी और उर्दू के प्रख्यात लेखक तारीक़ छतारी ने अपनी कहानियाँ प्रस्तुत कीं।

‘आमने-सामने’ कार्यक्रम में पंजाबी के बाल साहित्यकार कुलदीप सिंह दीप ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि गाँव के स्कूल में कई बार नाटकों का मंचन किया जाता था और उन्हीं की तैयारी करवाते-करवाते मैं भी नाटक लिखने लगा। गीतों के माध्यम से नाटक लिखता था। उन्होंने अपने नाटक ‘छल्ला‘ के बारे में बताते हुए कहा कि मेरे इस नाटक में कई छल्ले हैं जो घर से कई सपने लेकर निकलते हैं पर कभी वापस नहीं लौटते। ‘जलियाँवाला बाग‘ नाटक मेरा नैनो नाटक है। इसमें 10 छोटे-छोटे नाटक हैं। उन्होंने कहा कि नाटक के माध्यम से इतिहास को पढ़ाया जा सकता है। अंत में, उन्होंने ‘कलंगी और घोड़ा‘ कविता भी प्रस्तुत की।

मराठी के प्रख्यात लेखक विश्वास पाटील ने अपने चर्चित उपन्यासों ‘महानायक‘, ’पानीपत‘, ‘झाड़ा झड़ती‘ आदि की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि इन उपन्यासों के अनुवाद से मेरा परिचय भारतीय भाषाओं से हुआ। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपन्यास लिखना आसान नहीं है। कहानी को प्रस्तुत करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लेखक के पास सबसे बड़ी चुनौती होती है संदर्भ सामग्री के आधार पर पूरा उपन्यास तैयार करना।

अपने नए उपन्यास ’द ग्रेट कंचना सर्कस‘ के बारे में बताते हुए कहा कि यह कहानी रंगून की बमबारी में फँसी सर्कस की लड़की कंचन की कहानी है।

‘ओड़िआ की प्रख्यात लेखिका पारमिता शतपथी ने ‘स्मरे नित्यम‘ कहानी-संग्रह से ‘अग्निस्नाता‘ कहानी प्रस्तुत की। इस संग्रह में पौराणिक पात्रों सीता, द्रौपदी आदि नारी पात्रों और आधुनिक नारी से मिलती-जुलती जीवन स्थिति पर आधारित कहानियाँ हैं। यह कहानी द्रौपदी के जीवन और आधुनिक महिला की एक जैसी जीवन स्थिति पर आधारित थी। उर्दू के प्रख्यात लेखक तारिक़ छतारी ने ‘बंदूक‘ कहानी प्रस्तुत की। इस कहानी में उन्होंने बताया है कि नफ़रत के सौदागर तरह-तरह से, समाज में नफ़रत फैलाते हैं, लेकिन समाज में जब एक-दूसरे से संवाद होता है तो यह खाई ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाती। कार्यक्रमों का संचालन सहायक संपादक संदीप कौर ने किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी