वृंदावन चंद्रोदय मंदिर ने गुरुग्राम को किया कृष्णमय, भजन-कीर्तन पर झूमे श्रद्धालु

 


नई दिल्ली, 04 सितंबर (हि.स.)। वृंदावन चंद्रोदय मंदिर की ओर से दि निकुंज प्रिंसेज हॉल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन, श्रीकृष्ण लीला की प्रस्तुतियों, झांकियों और विशेष महाभिषेक ने श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। पूरा कार्यक्रम स्थल कृष्ण के जयघोषों से गूंजता रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत लड्डू गोपाल के विशेष अभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण को झूला झुलाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। विशेष महाभिषेक में पंचामृत, फलोदक, गंधोदक तथा औषधियों और जड़ी-बूटियों से अभिषेक किया गया। इसके बाद भगवान को हल्दी का लेप लगाया गया और आरती की गई। 108 कलश शुद्धोदक अभिषेक के साथ नौ विशेष कलश अभिषेक और अंत में पुष्पाभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भगवान को नए पोशाक धारण कराए गए और महाभोग अर्पित किया गया।

जन्माष्टमी समारोह में ध्रुव शर्मा-स्वर्णश्री की भजन मंडली ने श्रीकृष्ण लीला का गुणगान किया। गौड़ीय कीर्तन और महामंत्र कीर्तन ने पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का संचार किया। मंदिर के स्वयंसेवकों ने भी कृष्ण भजनों की प्रस्तुति दी। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के साथ श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।

कार्यक्रम के दौरान वीडियो के माध्यम से श्रद्धालुओं को वृंदावन में निर्माणाधीन वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के निर्माण कार्य की जानकारी दी गई।

वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। प्रस्तावित 70 मंजिला मंदिर की ऊंचाई 210 मीटर होगी। मंदिर का पहला साउथ विंग बनकर तैयार हो चुका है और पहले ब्लॉक में राधा-कृष्ण की मूर्तियां स्थापित की जा चुकी हैं। मंदिर की कल्पना श्रील प्रभुपाद ने की थी।

वहीं, गुरुग्राम के सेक्टर-43 में बन रहा श्री हरे कृष्ण मंदिर 108 फीट ऊंचा होगा और 50 हजार वर्ग गज में इसका निर्माण किया जा रहा है। हरे कृष्ण मूवमेंट गुरुग्राम द्वारा निर्मित यह मंदिर आध्यात्मिक केंद्र के साथ जरूरतमंदों के लिए अन्नपूर्णा का भंडार भी बनेगा। यहां प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

इस अवसर पर मंदिर के अध्यक्ष पूज्य चंचलापति प्रभु ने प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि हर घटना के पीछे भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका है। उन्होंने कहा कि कृष्ण चेतना को जागृत रखने का प्रमुख उपाय हरे कृष्ण महामंत्र का जाप और कीर्तन है। महामंत्र के जाप से मनुष्य में दैवीय गुणों का विकास होता है।

प्रवचन के बाद अतिथियों का सम्मान किया गया। अंत में भगवान की धूप, दीप, अर्घ्य, वस्त्र, पुष्प, चामर एवं व्यंजन से आरती की गई।

कार्यक्रम के समापन पर भगवान की पालकी यात्रा निकाली गई। श्रद्धालु नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए और भगवान पर पुष्पवर्षा की।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी