अभाविप ने लाल किले से वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को ऐतिहासिक, गौरवपूर्ण अवसर बताया
नई दिल्ली, 15 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों एवं युवाशक्ति को शुभकामनाएं देते हुए लाल किले की प्राचीर से वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर बताया। परिषद ने वंदे मातरम् के सम्मान एवं गायन को वैधानिक संरक्षण दिए जाने का भी स्वागत किया।
अभाविप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में युवाओं से जुड़ी घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कौशल प्रशिक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग, 5 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की देशव्यापी खेल प्रतिभा पहचान, सेमीकंडक्टर विनिर्माण के विस्तार, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता तथा आधुनिक सिविल डिफेंस स्वयंसेवी नेटवर्क जैसी पहलें युवाओं को अवसरों से जोड़ने और भारत को आत्मनिर्भर एवं भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
परिषद ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से ही राष्ट्रभाव और स्वतंत्रता की प्रेरणा का स्वर रहा है। वर्ष 1896 के कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर तथा 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा इसके गायन से लेकर भगत सिंह, रानी गाइडिन्ल्यू, कनकलता बरुआ सहित अनेक स्वतंत्रता सेनानियों एवं आदिवासी वीर-वीरांगनाओं के संघर्ष तक वंदे मातरम् देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर लाल किले की प्राचीर से पूर्ण वंदे मातरम् का गायन अमर बलिदानियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के सम्मान एवं गायन को वैधानिक संरक्षण दिया जाना भी अभिनंदनीय है।
उन्होंने सरकार की युवाकेंद्रित घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि एआई कौशल प्रशिक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग, खेल प्रतिभा पहचान तथा सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा एवं सिविल डिफेंस से जुड़ी पहलें युवाओं की क्षमता को अवसरों से जोड़ते हुए विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगी।
अभाविप ने कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को रोकने के कथित प्रयास की भी कड़ी निंदा की। परिषद ने इसे वंदे मातरम् के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का अपमान बताया। अभाविप ने युवाओं से अपील की कि वे स्वतंत्रता सेनानियों के संकल्प और राष्ट्रभाव को आत्मसात करते हुए ज्ञान, नवाचार और परिश्रम के माध्यम से 2047 तक विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी