यूनेस्को चेयर सम्मेलन 2026 में डीयू के प्रो. कुमार आशुतोष ने भारत का किया प्रतिनिधित्व
नई दिल्ली, 03 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कुमार आशुतोष ने जर्मनी के टीयू डॉर्टमुंड विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय यूनेस्को चेयर सम्मेलन 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। सम्मेलन में भारत से आमंत्रित वे एकमात्र वक्ता रहे। शिक्षा, कौशल विकास और सतत विकास लक्ष्यों पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने भारतीय शैक्षणिक दृष्टिकोण और शोध को प्रस्तुत किया।
सम्मेलन का विषय “उच्च शिक्षा एवं तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा व प्रशिक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग: सतत विकास लक्ष्यों के सिद्धांत और व्यवहार के बीच सेतु निर्माण” रहा। इसमें विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा का प्रमुख केंद्र उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की संभावनाएं रहीं।
प्रो. आशुतोष ने सम्मेलन में अपना शोध पत्र “पर्यटन क्षेत्र के कर्मचारियों में डिजिटल कौशल की कमी को दूर करना: यूरोपीय संघ और भारत से मिले सबूत” प्रस्तुत किया। यूरोपीय संघ और भारत के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित शोध में उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल कौशल की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के दौर में कुशल मानव संसाधन पर्यटन क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन के दौरान प्रो. आशुतोष ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। बातचीत में उच्च शिक्षा, कौशल विकास, सतत पर्यटन, संयुक्त शोध, शिक्षक-विद्यार्थी आदान-प्रदान और शैक्षणिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
जर्मनी प्रवास के दौरान उन्होंने औद्योगिक अध्ययन भ्रमण के तहत एक व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान का भी दौरा किया। यहां उन्होंने जर्मनी की व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली को करीब से समझा, जिसमें कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों पर विशेष जोर दिया जाता है। संस्थान में ऑटोमोबाइल तकनीक, दंत चिकित्सा, विद्युत प्रणाली और हीटिंग तकनीक जैसे क्षेत्रों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रो. आशुतोष के अनुसार, ‘करके सीखने’ की यह पद्धति ज्ञान, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जर्मन व्यावसायिक शिक्षा मॉडल का यह अनुभव भारत में अनुभव आधारित और उद्योग-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी हो सकता है।
प्रो. आशुतोष की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता पर दिल्ली विश्वविद्यालय के सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त की। विभाग के अनुसार, यह सहभागिता वैश्विक शैक्षणिक सहयोग, शोध और सतत विकास के क्षेत्र में विभाग की बढ़ती सक्रियता को दर्शाती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी