दिल्ली विस लोकतांत्रिक आवाज और स्वतंत्रता संग्राम की जीवंत गाथा : मोहन सिंह बिष्ट

 






नई दिल्ली, 27 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने रविवार को कहा कि दिल्ली विधानसभा उन महान व्यक्तित्वों के साहस की जीवंत गवाही है, जिन्होंने भारत की लोकतांत्रिक आवाज को सशक्त किया और स्वतंत्रता संग्राम को नया आयाम दिया।

मोहन सिंह बिष्ट ने आज वीर विठ्ठलभाई झावरभाई पटेल की 153वीं जयंती और शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हुए यह बात कही। दिल्ली विधानसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी दोनों महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की।

इस मौके पर विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि वीर विठ्ठलभाई पटेल और शहीद भगत सिंह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दो सशक्त आयामों का प्रतिनिधित्व करते हैं, एक ने विधायी संस्थाओं के माध्यम से भारतीयों की आवाज और गरिमा को सशक्त किया, जबकि दूसरे ने अपने साहस और बलिदान से पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया। ऐतिहासिक दिल्ली विधानसभा परिसर हमें याद दिलाता है कि भारत की स्वतंत्रता का संघर्ष विधायी संस्थाओं के भीतर भी लड़ा गया और उनके बाहर भी।

उन्होंने वीर विठ्ठलभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि 24 अगस्त 1925 को वे केंद्रीय विधानसभा के प्रथम भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष (स्पीकर) बने थे। उस समय केंद्रीय विधानसभा का संचालन वर्तमान दिल्ली विधानसभा परिसर से ही होता था। उनका कार्यकाल भारत के संसदीय इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव था। विठ्ठलभाई पटेल ने आसंदी की स्वतंत्रता और गरिमा को बनाए रखा, सदस्यों के अधिकारों एवं विशेषाधिकारों की रक्षा की तथा एक स्वतंत्र विधान सभा सचिवालय की स्थापना की दिशा में कार्य किया। निष्पक्षता, संसदीय अनुशासन और संस्थागत स्वायत्तता की उनकी विरासत आज भी देश की विधायी संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है।

शहीद भगत सिंह को स्मरण करते हुए मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि उनका नाम ऐतिहासिक केंद्रीय विधानसभा से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है, जहां 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने औपनिवेशिक कानूनों के विरोध में बम फेंके और उसके बाद हुई कार्यवाही के माध्यम से अपने प्रतिरोध का संदेश देश तक पहुंचाया। भगत सिंह का साहस, देशभक्ति और देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने का उनका संकल्प आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

ऐतिहासिक दिल्ली विधानसभा परिसर में विठ्ठलभाई पटेल और भगत सिंह को एक साथ श्रद्धांजलि अर्पित किया जाना भारत की विधायी विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के बीच गहरे संबंध की याद दिलाता है। यह वर्तमान पीढ़ी के उस दायित्व को भी रेखांकित करता है कि वह उन लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाए रखे, जिनके लिए अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव