वैधानिक नियुक्ति को लेकर एनएसयूआई ने आईटीपीआई अध्यक्ष प्रदीप कपूर पर उठाए सवाल, जांच की मांग
नई दिल्ली, 21 अगस्त (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के शासी मंडल में इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (आईटीपीआई) के प्रतिनिधि के रूप में आईटीपीआई अध्यक्ष प्रदीप कपूर के कथित नामांकन को लेकर गंभीर सवाल उठाया। एनएसयूआई ने मांग की कि नामांकन की वैधानिकता की जांच होने तक कपूर को शासी मंडल की सदस्यता से तत्काल निलंबित किया जाए।
एनएसयूआई का कहना है कि स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर अधिनियम, 2014 की धारा 13(2)(ग) में आईटीपीआई के एक प्रतिनिधि को अध्यक्ष द्वारा नामित किए जाने का प्रावधान है। संगठन के अनुसार, इस प्रावधान में आईटीपीआई अध्यक्ष को स्कूल के शासी मंडल का पदेन सदस्य बनाए जाने का उल्लेख नहीं है। ऐसे में यदि कपूर का नामांकन वैधानिक प्रावधानों या आईटीपीआई के लागू नियमों के विपरीत हुआ है, तो उनकी नियुक्ति की वैधता की जांच आवश्यक है।
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि कपूर ने कथित तौर पर शासी मंडल की विभिन्न बैठकों और कार्यवाहियों में भाग लिया है। इनमें सरकारी अधिकारियों एवं अन्य कर्मचारियों की भर्ती और चयन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी शामिल होने का दावा किया गया है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि शासी मंडल के सदस्य के तौर पर कपूर ने बैठक शुल्क, मानदेय, यात्रा एवं दैनिक भत्ते तथा अन्य लाभ प्राप्त किए या उनका दावा किया।
संगठन ने दिल्ली उच्च न्यायालय के सुधीर वोहरा बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय ने वास्तुकला परिषद से जुड़े समान प्रावधान की व्याख्या में “प्रतिनिधि” शब्द के वैधानिक महत्व पर विचार किया था। एनएसयूआई के मुताबिक, इस फैसले के आलोक में संस्थागत प्रतिनिधित्व को असीमित व्यक्तिगत नामांकन अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता।
एनएसयूआई ने मांग की है कि स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर अधिनियम, आईटीपीआई के संविधान एवं उपनियमों तथा संस्थागत प्रतिनिधित्व से संबंधित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर कपूर के नामांकन की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही, शासी मंडल और भर्ती संबंधी कार्यवाहियों में उनकी भागीदारी तथा स्कूल से प्राप्त सभी वित्तीय और अन्य लाभों की भी जांच की जाए।
संगठन ने कहा कि यदि किसी प्रकार का उल्लंघन जांच में साबित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ कथित रूप से प्राप्त वित्तीय लाभों की वसूली भी की जानी चाहिए। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर वह स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के बाहर प्रदर्शन करेगी और संस्थागत पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग उठाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी