ठोस कचरा प्रबंधन नियम और कचरा पृथक्करण को लेकर निगम की विशेष बैठक आयोजित
नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने ठोस कचरा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने, कचरे के स्रोत पर पृथक्करण को बढ़ावा देने तथा स्वच्छता व्यवस्था में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को निगम की विशेष बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता उप-महापौर डॉ. मोनिका पंत ने की।
इस बैठक में पार्षदों ने ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026, चार-तरीके से कचरा पृथक्करण, सर्कुलर इकोनॉमी, बल्क वेस्ट जनरेटर के पंजीकरण तथा स्वच्छता कर्मियों से संबंधित विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
बैठक के दौरान मुख्य अभियंता द्वारा पार्षदों को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के विभिन्न प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने कचरे के स्रोत पर ही उचित पृथक्करण, कचरे के वैज्ञानिक संग्रहण एवं प्रबंधन, पुनर्चक्रण तथा संसाधनों के पुनः उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
साथ ही चार तरीके से कचरा पृथक्करण की आवश्यकता पर जानकारी देते हुए उपमहापौर ने बताया कि घरों, संस्थानों, बाजारों तथा अन्य प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित श्रेणियों में अलग-अलग रखना ठोस कचरा प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने पार्षदों को इस दिशा में जन-जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन अभियान चलाने की आवश्यकता से भी अवगत कराया।
उप-महापौर डॉ.मोनिका पंत ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए नियमों की जानकारी, उनके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी तीनों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निगम के निर्वाचित प्रतिनिधि अपने-अपने वार्डों में नागरिकों, आरडब्ल्यूए, बाजार संगठनों, संस्थानों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर कचरा पृथक्करण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कचरे का स्रोत पर ही उचित पृथक्करण होने से उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके लिए वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान, डेमोंस्ट्रेशन ड्राइव और नागरिक संवाद कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
बैठक में पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन से जुड़ी स्थानीय समस्याओं और चुनौतियों को भी सामने रखा। उन्होंने कचरा पृथक्करण को प्रभावी बनाने, नियमित जागरूकता अभियान चलाने, बल्क वेस्ट जनरेटर के पंजीकरण एवं अनुपालन को मजबूत करने, कचरा संग्रहण व्यवस्था में सुधार तथा स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा एवं कल्याण से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उप-महापौर ने कहा कि स्वच्छता और बेहतर कचरा प्रबंधन सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को पार्षदों द्वारा दिए गए सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी