'सोजे वतन’ भारतीयता और राष्ट्रीय चेतना से ओतप्रोत : डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’
नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। सुपरिचित लेखक डॉ. राजकुमार उपाध्याय ‘मणि’ ने कहा कि प्रेमचंद लिखित कहानी-संग्रह ‘सोजे वतन’ भारतीयता और राष्ट्रीय चेतना की भावना से ओतप्रोत है। ‘सोजे वतन’ में आजादी का मंत्र प्रस्तुत हुआ है और इसकी कहानियां राष्ट्रप्रेम, त्याग तथा समर्पण की भावना को प्रखर करती हैं।
डॉ. मणि शुक्रवार को अखिल भारतीय साहित्य परिषद् से संबद्ध इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती की ओर से प्रवासी भवन, दिल्ली में प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आयोजित ‘सोजे वतन’ पुस्तक चर्चा में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद जन्मजात देशभक्त थे। ब्रिटिश सरकार ने ‘सोजे वतन’ की लगभग 700 प्रतियां जब्त कर ली थीं। प्रतिबंध के बाद क्रांतिकारी पुस्तक की बची हुई प्रतियों को छिपाकर पढ़ते थे, ताकि उनमें देशप्रेम की भावना और प्रखर हो सके। उन्होंने क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि प्रगतिशील आलोचकों ने ‘गोदान’, ‘कफन’ और ‘पूस की रात’ जैसी रचनाओं को तो पाठ्यक्रम में स्थान दिया, लेकिन ‘सोजे वतन’ को उपेक्षित रखा।
कवि विनय विक्रम सिंह ने कहा कि ‘सोजे वतन’ प्रेमचंद की आरंभिक कहानियों का संग्रह है, जिसमें ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना पर जोर दिया गया है। भाषायी दृष्टि से भी यह कृति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें फारसी, उर्दू और हिंदी का विविधतापूर्ण प्रयोग देखने को मिलता है।
युवा लेखक अविरल अभिलाष ने कहा कि ‘सोजे वतन’ भौतिकवादी धारणा को ध्वस्त कर राष्ट्रप्रेम को प्रतिष्ठित करती है। यह बताती है कि राष्ट्रप्रेम केवल राजनीतिक नारों से नहीं बल्कि सच्चे त्याग और बलिदान से प्रखर होता है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की राख से उठी राष्ट्रवाद की चिनगारी ने देश में क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित कर दी। ‘सोजे वतन’ यह स्मरण कराती है कि राष्ट्र सर्वोपरि है।
हिन्दी अकादमी, दिल्ली के पूर्व उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा ने कहा कि ‘सोजे वतन’ की कहानियों की विशेषता यह है कि वे पारंपरिक प्रेम कहानी से शुरू होती हैं, लेकिन अंततः देशभक्ति की कहानी में परिवर्तित हो जाती हैं। वरिष्ठ साहित्यकार सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि पुस्तक में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने पर बल दिया गया है और इसने एक मौन क्रांति पैदा की। वरिष्ठ लेखिका शकुंतला मित्तल ने कहा कि ‘सोजे वतन’ की मूल आत्मा त्याग और समर्पण पर टिकी हुई है।
पुस्तक-चर्चा का संचालन करते हुए विकास आनंद ने कहा कि वर्ष 1908 में प्रकाशित ‘सोजे वतन’ एक महत्वपूर्ण पुस्तक है। इसमें अपनी मातृभूमि की मिट्टी और जड़ों के प्रति अगाध प्रेम को अभिव्यक्ति मिली है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में ‘दुनिया का सबसे अनमोल रतन’, ‘यही मेरा वतन है’, ‘शेख मखमूर’, ‘शोक का पुरस्कार’ तथा ‘सांसारिक प्रेम और देशप्रेम’ सहित कुल पांच कहानियां संकलित हैं।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के केंद्रीय कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, डॉ. विवेक विश्वास एवं अभय त्रिपाठी सहित साहित्य जगत से जुड़े अनेक लोग उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी