मंत्री सूद ने पाठ्यपुस्तक घोटाले के आरोपों को सिरे से किया खारिज

 


नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी (आआपा) नेताओं के पाठ्यपुस्तकों की खरीद में घोटाले के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि आआपा दिल्ली शिक्षा विभाग की प्रगति को बाधित करने के लिए निराधार आरोपों और तथाकथित ‘हूट एंड शूट’ राजनीति का सहारा ले रही है।

शिक्षा मंत्री ने दिल्ली सचिवालय में शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस में पाठ्यपुस्तकों की वास्तविक प्रतियां, टेंडर से संबंधित कार्यादेश और मापने के लिए स्केल प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर इन आरोपों की सच्चाई को परखा जा सकता है। आआपा के पुराने नेताओं और नए नेताओं के बीच अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की होड़ लगी हुई है। उनकी पार्टी में नए ‘छोटू’ आ गए हैं। पुराने और बड़े छोटुओं की प्रासंगिकता नए और छोटे छोटुओं से अधिक बनी रहे, इसलिए बेरोजगार नेता अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए झूठ फैला रहे हैं। बड़े छोटुओं और छोटे छोटुओं की इसी अंदरूनी लड़ाई में ये नेतृत्वविहीन नेता निराधार आरोप लगाते फिर रहे हैं। उन्होंने आआपा के आरोपों के जवाब में वर्ष 1971 की फिल्म ‘नया जमाना’ का गीत ‘चोरों को सारे नजर आते हैं चोर’ भी प्रेस कांफ्रेंस में चलवाया।

कक्षा 8 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ की खरीद को लेकर लगाए गए आरोपों पर शिक्षा मंत्री ने वर्तमान सरकार की खरीद प्रक्रिया की तुलना पिछली आआपा सरकार के कार्यकाल में हुई खरीद से की। मंत्री ने कहा कि आआपा ने एनसीईआरटी द्वारा पुस्तक 65 रुपये में बेचे जाने को लेकर सवाल उठाए, जबकि दिल्ली सरकार ने ‘मल्हार’ पाठ्यपुस्तक 28.61 रुपये में खरीदी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में पिछली आआपा सरकार के कार्यकाल में समान आकार की ‘गृह विज्ञान’ पुस्तक की छपाई 55 रुपये में कराई गई थी, जो वर्तमान कीमत से लगभग दोगुनी है।

मंत्री सूद ने बताया कि टेंडर में पुस्तकों का आकार 17.1 सेंटीमीटर × 24.1 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया था, जो निर्धारित मानक के अनुरूप है। उन्होंने पत्रकारों से उपलब्ध कराए गए स्केल की मदद से पुस्तकों का माप लेकर स्वयं इसकी पुष्टि करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछली आआपा सरकार के कार्यकाल में कुछ पाठ्यपुस्तकों की कीमत 110 रुपये और 133 रुपये तक थी, जबकि वर्तमान सरकार ने अधिकतम पुस्तक मूल्य 51 रुपेये तक सीमित रखा है।

मंत्री ने बताया कि विभिन्न कक्षाओं की पुस्तकों की कीमतों में कमी है। कक्षा 8 की पुस्तक पिछली सरकार के समय अधिकतम कीमत 110 रुपये थी, जबकि वर्तमान खरीद में कीमत 50.38 रुपये तक है। कक्षा 7 की पुस्तक पिछली सरकार के समय अधिकतम कीमत 103 रुपये थी, जबकि वर्तमान कीमत 75.88 रुपये तक है। कक्षा 6 की पुस्तक पिछली सरकार के समय अधिकतम कीमत 133 रुपये थी, जबकि वर्तमान कीमत 57.76 रुपये तक है।

मंत्री सूद ने कहा कि आआपा के नेता ‘हूट एंड शूट’ की राजनीति करते हैं। पहले झूठ बोलो, फिर 40 प्रतिशत कमीशन जैसे आरोप लगाओ और उसके बाद भाग जाओ। इन्हें एक किताब की कीमत तक पता नहीं है, लेकिन ये घोटाले का आरोप लगा रहे हैं। वास्तविकता यह है कि आआपा के शासनकाल में 60 प्रतिशत कमीशन का कारोबार होता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि समीक्षा पूरी होने के बाद जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने और जनता को गुमराह करने के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री सूद ने 17 अगस्त 2023 और 6 सितंबर 2023 को तत्कालीन शिक्षा सचिव द्वारा लिखे गए आधिकारिक पत्र भी जारी किए। उनके अनुसार इन पत्रों में पिछली आआपा सरकार के कार्यकाल में आपूर्ति की गई पाठ्यपुस्तकों की छपाई और गुणवत्ता को लेकर कमियां दर्ज की गई थीं। उन्होंने कहा कि आआपा सरकार के अपने शिक्षा सचिव वर्ष 2023 में ही पुस्तकों की खराब छपाई पर सवाल उठा रहे थे। उस समय समान आकार की पुस्तकों की छपाई 55 में कराई गई थी, जबकि हमारी सरकार में पुस्तकों की खरीद 28.61 रुपये में पारदर्शी तरीके से की जा रही है। पुस्तकों को निर्धारित गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरने के बाद खरीदा जा रहा है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आआपा के नेता अपने पिछले कार्यकाल के कथित भ्रष्टाचार के कारण हर जगह घोटाले देखते हैं। उन्होंने घोषणा की कि पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़े कई बड़े मामलों को क्रमबद्ध तरीके से तथ्यों और साक्ष्यों के साथ जनता के सामने लाया जाएगा।

मंत्री सूद ने कहा कि दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में एक कहावत प्रचलित है—‘पापी जाने पाप, जैसा हूं मैं आप।’ जो लोग दस साल तक घोटाले करते रहे उन्हें हर जगह घोटाला ही दिखाई देता है। शिक्षा मंत्री ने आआपा के आरोपों के जवाब में वर्ष 1971 की फिल्म ‘नया ज़माना’ का गीत ‘चोरों को सारे नजर आते हैं चोर’ भी स्क्रीन पर चलवाया। उन्होंने कहा कि यह गीत ही उनका पूरा जवाब है। पुस्तकों को दिए गए स्केल से मापिए, कार्यादेश में दर्ज दरों की जांच कीजिए और उनके अपने शिक्षा सचिव के पत्र देखिए। सभी तथ्य पारदर्शिता के साथ आपके सामने हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव