सिरसा ने राहुल गांधी पर देश को अस्थिर करने की राजनीति का लगाया आरोप

 


नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे देश को अस्थिर करने, समाज में तनाव पैदा करने और लोगों को भड़काने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। 1 नवंबर से कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित धरना-प्रदर्शनों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए देश में भ्रम और अस्थिरता का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।

सिरसा ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, वह देश के लिए चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने अतीत में जिस राजनीति का सहारा लिया, राहुल गांधी भी उसी रास्ते पर आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी ने धरना-प्रदर्शन के लिए फिर 1 नवंबर की तारीख क्यों चुनी? 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए सिरसा ने कहा कि 1 नवंबर 1984 का दिन सिख समुदाय के लिए कभी न भूलने वाला दर्द लेकर आया था। दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में हजारों सिखों की हत्या हुई और अनेक परिवार उजड़ गए। उन्होंने कहा कि 1984 के पीड़ित परिवारों के जख्म आज भी ताजा हैं और वे न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं।

सिरसा ने कहा कि 1984 की घटनाओं में कांग्रेस के कई नेताओं की भूमिका को लेकर आरोप, जांच और कानूनी मामले लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे हैं। उन्होंने जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार और कमलनाथ से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वे देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल पैदा करना चाहते हैं। जनता को भड़काने और समाज को बांटने की राजनीति देश स्वीकार नहीं करेगा।

सिरसा ने राहुल गांधी के विदेश दौरों और विदेशी संगठनों एवं ताकतों से संपर्क को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि विदेशों में किन लोगों और किन संगठनों से मुलाकातें की जा रही हैं तथा उनका उद्देश्य क्या है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि आखिर फर्जी जैन-जी के सहारे कब तक राजनीति करेंगे राहुल गांधी? उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह होकर गलत रास्ते पर नहीं चलना चाहिए और न ही किसी के राजनीतिक स्वार्थ का मोहरा बनना चाहिए। युवाओं की ऊर्जा देश के विकास और सकारात्मक बदलाव में लगनी चाहिए, न कि देश में अराजकता फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिशों में।

उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 1984 की तारीख सिख समाज के लिए सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के दर्द और त्रासदी की याद है। ऐसे में इस तारीख के आसपास होने वाली किसी भी राजनीतिक गतिविधि को लेकर विशेष संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।

सिरसा ने कहा कि 1984 के पीड़ित परिवारों के जख्मों को फिर से कुरेदने वाली किसी भी राजनीतिक कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होना चाहिए, न कि तनाव, हिंसा या अराजकता के जरिए। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 1984 को जो कुछ हुआ, उसकी पीड़ा सिख समाज आज भी नहीं भूला है। उस दर्द का राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने की किसी भी कोशिश का हम कड़े शब्दों में विरोध करते हैं।

सिरसा ने कहा कि भारत के लोग लोकतंत्र, शांति और सामाजिक सद्भाव में विश्वास रखते हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह, उकसावे या भड़काऊ गतिविधि का हिस्सा न बनें और देश की एकता एवं अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव