जम्मू-कश्मीर प्रवासी परिवारों के लिए राहत वितरण प्रक्रिया हुई और आसान : रेखा गुप्ता
- मार्च 2024 तक पंजीकृत परिवारों को एकमुश्त विशेष छूट, 15 सितंबर 2026 तक ‘फॉर्म-ए’ जमा करने का अवसर
नई दिल्ली, 29 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने जम्मू-कश्मीर प्रवासी लाभार्थियों को दी जाने वाली तदर्थ मासिक राहत के वितरण को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर प्रवासी परिवारों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मार्च 2024 तक राहत प्राप्त कर रहे सभी पंजीकृत प्रवासी परिवारों को एकमुश्त विशेष छूट (एमनेस्टी) प्रदान की गई है। यह योजना जून महीने में कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई थी। इसके तहत उन्हें 1 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार अपने वर्तमान परिवार का विवरण घोषित करने का अवसर दिया गया है। इसके लिए प्रत्येक परिवार को ‘फॉर्म-ए’ भरकर जमा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अप्रैल 2026 में पुराने नियमों के तहत जमा किए गए घोषणा-पत्र अब मान्य नहीं होंगे और उन्हें निरस्त माना जाएगा।
‘फॉर्म-ए’ जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद जिला अधिकारियों को परिवारों के विवरण अपडेट कर प्रति परिवार अधिकतम चार सदस्यों के आधार पर तदर्थ मासिक राहत (एएमआर) जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन परिवारों को नियमों के अनुसार परिवार विभाजन कराना है, उन्हें ‘फॉर्म-ए’ के साथ ‘फॉर्म-बी’ भी जमा करना होगा ताकि उनका आवेदन नियमानुसार निस्तारित किया जा सके।
सरकार ने राहत वितरण को और अधिक जनहितकारी बनाते हुए मासिक पारिवारिक आय की सीमा पूरी तरह समाप्त कर दी है। अब किसी भी पात्र लाभार्थी को आय प्रमाण पत्र या अचल संपत्ति से संबंधित कोई दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे हजारों प्रवासी परिवारों को अनावश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी और सहायता प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।
राहत प्राप्त करने वाले परिवारों के संबंध में विवाह एवं पारिवारिक स्थिति से जुड़े नियम भी स्पष्ट कर दिए गए हैं। राहत का निर्धारण संबंधों और वैवाहिक स्थिति के आधार पर किया जाएगा, चाहे लाभार्थी का वर्तमान निवास स्थान कहीं भी हो। यदि किसी प्रवासी परिवार की बेटी का विवाह किसी अन्य प्रवासी परिवार में होता है तो उसका नाम नए प्रवासी परिवार में जोड़ा जाएगा। यदि किसी गैर-प्रवासी लड़की का विवाह प्रवासी परिवार में होता है तो उसका नाम उस प्रवासी परिवार में शामिल किया जाएगा। वहीं यदि किसी प्रवासी लड़की का विवाह गैर-प्रवासी परिवार में होता है तो उसका नाम प्रवासी परिवार से हटाया जाएगा और वह राहत प्राप्त करने की पात्र नहीं रहेगी।
31 मार्च 2026 तक की अवधि का बकाया (एरियर) भी जारी किया जाएगा। इसके लिए पुराने राहत कार्ड, वर्तमान परिवार प्रमुख के आधार कार्ड और वार्षिक स्व-घोषणा के आधार पर भुगतान किया जाएगा ताकि पात्र लाभार्थियों को उनका लंबित भुगतान समय पर मिल सके। आवश्यकता पड़ने पर उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या तहसीलदार द्वारा फील्ड वेरीफीकेशन कराया जाएगा। साथ ही सभी लाभार्थियों को अपने दावे केवल पूर्व निर्धारित जिलों में ही जमा करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सरकार जम्मू-कश्मीर प्रवासी परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। आय मानदंड को समाप्त करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने से हजारों परिवारों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी और समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव