राजा नाहर सिंह का बलिदान साहस और संघर्ष का अमर प्रतीक : विजेंद्र गुप्ता

 


नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को स्वतंत्रता सेनानी राजा नाहर सिंह को दिल्ली विधानसभा में उनके शहीद दिवस अथवा बलिदान दिवस के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 1857 के विद्रोह में राजा नाहर सिंह ने साहसिक और निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध दृढ़ प्रतिरोध किया और अंततः राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि राजा नाहर सिंह का बलिदान हमारी सामूहिक राष्ट्रीय स्मृति को निरंतर प्रेरित करता रहा है। उनकी विरासत का सम्मान करने के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा अन्य अनेक क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में उपस्थित हुए हैं। जैसा कि कहा जाता है कि शहीदों के चिताओं पर मेले लगते हैं, यही सतत स्मरण उन वीरों की सच्ची पहचान है जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्योछावर किए,।

बल्लभगढ़ के अंतिम शासक राजा नाहर सिंह के जीवन एवं बलिदान को स्मरण करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व करते समय राजा नाहर सिंह मात्र 32 वर्ष के थे। उन्होंने औपनिवेशिक सत्ता के आगे झुकने से इनकार किया और ब्रिटिश प्रभुत्व के विरुद्ध दृढ़तापूर्वक खड़े रहे। अंततः 9 जनवरी 1858 को उन्हें चांदनी चौक में फांसी दी गई। उनका राज्य जब्त कर लिया गया और संपत्तियाँ जब्त कर ली गईं, जो औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

राजा नाहर सिंह के शहीदी दिवस को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो राष्ट्र के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान का स्मरण कराता है। आज दिल्ली विधानसभा में अर्पित पुष्पांजलि उनके साहस, देशभक्ति और भारत की स्वतंत्रता के प्रति उनके अटूट समर्पण के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है तथा उन वीरों की अमर विरासत को सम्मानित करने के हमारे संकल्प का पुनः स्मरण कराती है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव