(अपडेट) पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत दिल्ली को मिलेंगी 2,800 इलेक्ट्रिक बसें

 


नई दिल्ली, 18 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के पहले चरण के तहत राजधानी में 2,800 नई एसी लो-फ्लोर इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का फैसला लिया है। ये बसें अगले साल से सड़कों पर चलने लगेंगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इसी विजन के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करते हुए इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प वर्ष 2028-29 तक सार्वजनिक परिवहन बेड़े को लगभग 14,000 बसों तक बढ़ाने का है। इन बसों को शामिल करने का निर्णय हाल ही में दिल्ली कैबिनेट की बैठक में लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2,800 शून्य-उत्सर्जन इलेक्ट्रिक बसों का शामिल होना दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के साथ-साथ नागरिकों को अधिक सुविधाजनक, आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इन 2,800 इलेक्ट्रिक बसों में 1,400 बसें 12 मीटर लंबी और 1,400 बसें 9 मीटर लंबी होंगी। 9 मीटर लंबी बसें संकरी सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन के लिए विशेष रूप से उपयोगी होंगी। इससे यात्रियों को मुख्य मार्गों से आगे अंतिम छोर तक बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

दिल्ली कैबिनेट की जानकारी के मुताबिक, सरकार ने पिछले वर्ष कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) को 2,800 इलेक्ट्रिक बसों की अपनी आवश्यकता भेजी थी। बाद में दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल इंटरकनेक्टर (डीईवीआई/देवी) बसों के संचालन से मिले अनुभव के आधार पर बसों की आवश्यकता को संशोधित करते हुए 1,400 बारह मीटर और 1,400 नौ मीटर की समान संख्या में बसें शामिल करने का निर्णय लिया गया। 2,800 बसों को शामिल करने के लिए सीईएसएल द्वारा देशव्यापी प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे प्रतिस्पर्धी दरों पर बसों के संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

पीएम ई-ड्राइव फेज-I के तहत इस परियोजना के लिए 12 मीटर की प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस पर 35 लाख रुपये अधिकतम और 9 मीटर की प्रत्येक इलेक्ट्रिक बस पर 25 लाख रुपये अधिकतम की सरकारी वित्तीय सहायता का प्रावधान है। 2,800 बसों को ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल के तहत दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में शामिल किया जाएगा और उनका संचालन निर्धारित सेवा व्यवस्था के तहत होगा। सभी 2,800 बसों का संचालन दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा किया जाएगा। जीसीसी मॉडल के तहत बसों के संचालन और सेवा अनुबंध की अवधि 12 वर्ष होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष अप्रैल से इन आधुनिक बसों को दिल्ली की सड़कों पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। अगस्त 2028 तक बसों का पूरा बेड़ा राजधानी के सार्वजनिक परिवहन सिस्टम में शामिल हो जाएगा। बसों के प्रभावी संचालन और बेहतर रूट प्लानिंग के लिए आईआईटी दिल्ली के सहयोग से बस रूटों का युक्तिसंगत पुनर्गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से विस्तारित इलेक्ट्रिक बस बेड़े की तैनाती को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। बस मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनों (ईटीएम) के उपयोग से बस संचालन की निगरानी, प्रबंधन और टिकटिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव