विधानसभा में नागरिकों को समय पर सेवाएं देने वाला विधेयक पास

 


नई दिल्ली, 11 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को ‘दिल्ली (नागरिकों का समय पर और आसानी से सेवाएं पाने का अधिकार) विधेयक, 2026’ विधानसभा में चर्चा के बाद पास हो गया। इस दौरान विपक्ष के केवल एक सदस्य (अनिल झा) ही मौजूद रहें। इसे विधेयक को दिल्ली के आईटी मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने विधानसभा में चर्चा के लिए पेश किया।

आईटी मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य दिल्लीवासियों को सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा में, पारदर्शी और बिना अनावश्यक भागदौड़ के उपलब्ध कराना है। यह विधेयक वर्ष 2011 के कानून का स्थान लेगा। विधेयक के तहत प्रत्येक नागरिक को निर्धारित समय-सीमा में सरकारी सेवा प्राप्त करने का कानूनी अधिकार मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक आवेदन को यूनिक एप्लीकेशन नंबर दिया जाएगा, जिससे नागरिक घर बैठे अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। निर्धारित समय में सेवा न मिलने पर आवेदन स्वतः वरिष्ठ अधिकारी के पास ऑटो-एस्केलेशन के माध्यम से पहुंच जाएगा।

उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों के तहत बिना उचित कारण सेवा में देरी करने या गलत तरीके से आवेदन खारिज करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। संबंधित अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना, अधिकतम 5,000 रुपये तक लगाया जा सकेगा। गलत तरीके से आवेदन अस्वीकार करने पर भी 250 रुपये से 5,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है और यह राशि संबंधित अधिकारी और जमाने के तौर पर लगेगा। कार्रवाई से पहले अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

विधेयक के तहत प्रथम स्तर पर शिकायत का निवारण संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अधिकतम 30 दिनों में किया जाएगा। इसके बाद नागरिक दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन में दूसरी अपील कर सकेगा। प्रस्तावित कमीशन को सरकारी कार्यालयों के निरीक्षण, रिकॉर्ड की जांच, समन जारी करने और लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने जैसी शक्तियां दी जाएंगी।

यह कानून पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में लागू होगा और दिल्ली सरकार के नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली पालिक परिषद, दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण सहित अधिसूचित स्थानीय निकायों एवं संस्थाओं की निर्धारित सेवाओं पर लागू होगा।

चर्चा के दौरान विपक्ष पर जोरदार हमला करते हुए डा. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने 11 सालों तक दिल्ली पर शासन किया और बुनियादी नागरिक और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान करने में नाकाम रहे, उन्हें सिस्टम में सुधार लाने की हमारी सरकार की कोशिशों पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रिकॉर्ड रहा है कि न तो उसने खुद काम किया और न ही दूसरों को काम करने दिया है। अब विपक्ष मौजूदा सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाकर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।

इस विधेयक की अहमियत बताते हुए आईटी मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का मकसद बिल्कुल साफ है- नागरिकों को उन सेवाओं को पाने के लिए एक सरकारी दफ़्तर से दूसरे दफ़्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ें, जिन पर उनका अधिकार हैं। नए सिस्टम के तहत नोटिफ़ाई की गई सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा के प्रदान करनी होंगी। नागरिक 'यूनिक एप्लीकेशन नंबर' के जरिए डिजिटल रूप से आवेदन कर सकेंगे और अपने आवेदन को घर बैठे ट्रैक भी कर सकेंगे। अगर कोई सेवा तय समय-सीमा के अंदर नहीं प्रदान की जाती है, तो सिस्टम में ऑटो-एस्केलेशन की ऐसी व्यवस्था होगी कि मामला अपने-आप सीनियर अधिकारी के पास चला जाए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में अपील करने का एक व्यवस्थित तरीका भी बताया गया है, जिसके तहत शिकायतों पर सबसे पहले एक सीनियर अधिकारी विचार करेगा और उसके बाद दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन के समक्ष दूसरी अपील की जा सकेगी।

आईटी मंत्री ने कहा कि यह कानून एक ऐसे सिस्टम से एक ऐसे सिस्टम की तरफ बुनियादी बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे और अब सरकारी सिस्टम नागरिकों के प्रति जवाबदेह होगा। उन्होंने कहा कि फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती नहीं रहेगी। सर्विस एक तय समय-सीमा के अंदर पूरी होगी। नागरिक को इधर-उधर भागना नहीं पड़ेगा। सिस्टम को जवाब देना होगा। देरी छिपी नहीं रहेगी। ऑटो-एस्केलेशन होगा, लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर काम की जवाबदेही तय की जाएगी।

डा. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ एक प्रशासनिक सुधार मात्र नहीं है, बल्कि नागरिक और सरकार के बीच भरोसे के रिश्ते को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने आगे कहा कि हम एक ऐसा दिल्ली बनाना चाहते हैं जहां सरकारी सेवाओं में देरी एक अपवाद हो, जवाबदेही के लिए सख्त नियम हो और नागरिकों के अधिकार सबसे ऊपर हों। साथ ही उन्होंने विधानसभा के सभी सदस्यों से अपील की कि वे सरकार की उन कोशिशों का समर्थन करें जिनसे एक तय समय-सीमा वाली, पारदर्शी, सुलभ और जवाबदेह शासन व्यवस्था बनाई जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव