डॉक्टरों की सुरक्षा, कानूनी मदद और काउंसलिंग के लिए ओजोन फार्मास्यूटिकल्स ने शुरू की ‘ओजोन शील्ड’ पहल

 




नई दिल्ली, 16 सितंबर (हि.स.)। देशभर में डॉक्टरों के साथ हिंसा, धमकी, उत्पीड़न और कानूनी विवादों की बढ़ती घटनाओं के बीच ओजोन फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने बुधवार को डॉक्टरों को आपातकालीन सुरक्षा सहायता, कानूनी मदद और भावनात्मक संबल उपलब्ध कराने के लिए ‘ओजोन शील्ड’ पहल शुरू की। इसकी शुरुआत स्त्री रोग विशेषज्ञों से की जा रही है और आगे अन्य चिकित्सा विशेषज्ञताओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

यहां इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने पहल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में ओजोन फार्मास्यूटिकल्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक सुभाष सहगल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल कोठियाल, वरिष्ठ अधिकारी राकेश रत्ती, महाप्रबंधक विशाल भारद्वाज और कंपनी की क्षेत्रीय टीम के सदस्य मौजूद रहे। चिकित्सा क्षेत्र से सर गंगा राम अस्पताल की आईवीएफ विभाग प्रमुख डॉ. आभा मजूमदार, अपोलो अस्पताल नोएडा की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. संचिता दुबे, छाबड़ा मेडिकेयर सेंटर की निदेशक डॉ. किरण छाबड़ा और विशेषज्ञ डॉ. अनुपम शर्मा सहित कई चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में ‘प्रोटेक्टिंग द प्रोटेक्टर्स’ विषय पर पैनल चर्चा भी हुई। इसमें चिकित्सकों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, गंभीर चिकित्सीय परिस्थितियों में मरीजों के परिजनों के उग्र व्यवहार, कानूनी कार्रवाई और सोशल मीडिया के दबाव से जुड़े अनुभव साझा किए। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि चिकित्सकों की सुरक्षा केवल उनके व्यक्तिगत हित से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता से भी है।

ओजोन फार्मास्यूटिकल्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक सुभाष सहगल ने कहा कि फार्मा उद्योग और डॉक्टर समाज की सेवा के लिए मिलकर काम करते हैं। जब डॉक्टर हिंसा या अनावश्यक कानूनी विवादों का सामना करते हैं तो उनके साथ खड़ा होना उद्योग की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ‘ओजोन शील्ड’ का उद्देश्य मुश्किल परिस्थितियों में डॉक्टरों को सुरक्षा, कानूनी सहायता और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराना है।

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी राकेश रत्ती ने कहा कि डॉक्टर कई मरीजों की जान बचाने के लिए पूरी क्षमता से काम करते हैं, लेकिन किसी गंभीर चिकित्सीय परिस्थिति में मरीज को नुकसान होने पर कई बार पूरा दोष डॉक्टर पर डाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। डॉक्टर के भयभीत या घायल होने का असर दूसरे मरीजों के इलाज पर भी पड़ता है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल कोठियाल ने डॉक्टरों की भूमिका की तुलना सैनिकों से करते हुए कहा कि जिस तरह सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, उसी तरह डॉक्टर समाज के जीवन की रक्षा के लिए लगातार काम करते हैं। इसलिए संकट की स्थिति में उनके साथ खड़ा होना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

पैनल चर्चा में डॉ. आभा मजूमदार ने अपने लंबे चिकित्सकीय अनुभव का उल्लेख करते हुए डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि कई चिकित्सकों को वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा और बाद में वे निर्दोष साबित हुए, लेकिन इस दौरान उन्हें मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ा।

डॉ. संचिता दुबे ने कहा कि बड़े अस्पतालों में कानूनी और सुरक्षा तंत्र उपलब्ध होते हैं, लेकिन छोटे नर्सिंग होम और निजी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों के पास ऐसी सहायता सीमित होती है। उन्होंने चिकित्सकों के लिए आपातकालीन सुरक्षा के साथ मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. किरण छाबड़ा ने कहा कि कई डॉक्टर आपसी संपर्क और व्हाट्सऐप समूहों के जरिए मुश्किल परिस्थितियों में एक-दूसरे की मदद करने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। डॉ. अनुपम शर्मा ने कहा कि समाज को यह समझना चाहिए कि डॉक्टर भी इंसान हैं और वे मरीजों का इलाज पूरी जिम्मेदारी के साथ करते हैं।

कंपनी ने एक हालिया राष्ट्रव्यापी सर्वे का भी हवाला दिया, जिसमें एम्स, सफदरजंग अस्पताल और वीएमएमसी के विशेषज्ञों ने 1,500 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया था। कंपनी के अनुसार, सर्वे में 78.4 फीसदी डॉक्टरों ने ड्यूटी के दौरान धमकी मिलने की बात कही, जबकि 58.2 फीसदी ने कार्यस्थल पर खुद को असुरक्षित बताया।

कंपनी के अनुसार, ‘ओजोन शील्ड’ के तहत मुश्किल परिस्थितियों में फंसे डॉक्टरों को आपातकालीन सुरक्षा सहायता, मेडिको लीगल मामलों में कानूनी मदद और विशेषज्ञों के माध्यम से भावनात्मक काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी। डॉक्टर एक विशेष व्हाट्सऐप चैटबॉट के माध्यम से सामान्य जानकारी साझा कर इस सुरक्षा नेटवर्क से जुड़ सकेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी