एनएसयूआई ने डीयू कुलपति पर कार्यक्रम में शामिल होने पर उठाए सवाल, इस्तीफे की मांग की
नई दिल्ली, 08 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह का सत्या निकेतन की घटना के बाद विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होने पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने कड़ी निंदा की। उन्होंने कुलपति से इस्तीफे की मांग की।
एनएसयूआई के सदस्यों ने आर्ट्स फैकल्टी के पास आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन किया, जिसमें डीयू के कुलपति शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए सत्या निकेतन त्रासदी से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के प्रति जवाबदेही की मांग की।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि जब सत्या निकेतन की त्रासदी के बाद छात्र और उनके परिवार असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं, तब डीयू के कुलपति ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि कुलपति ने प्रभावित छात्रों के कितने परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की है? उन्होंने कितने छात्रों से मिलकर उनका हाल जाना है? विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र आवास और हॉस्टल सुविधाओं के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने से क्यों बच रहा है?
विनोद जाखड़ ने कहा कि सत्या निकेतन की त्रासदी ने एक बार फिर दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती हॉस्टल की गंभीर कमी को उजागर किया है। जब विश्वविद्यालय पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो छात्रों को असुरक्षित और उचित नियमन के अभाव वाले निजी आवासों पर निर्भर रहना पड़ता है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मांग की कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों के लिए तत्काल सुरक्षित, किफायती और पर्याप्त हॉस्टल सुविधाओं का विस्तार करे तथा यह सुनिश्चित करे कि छात्रों के आवास निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करते हों।
जाखड़ ने कहा कि जब डीयू प्रशासन छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ले सकता, हॉस्टल संकट का समाधान नहीं कर सकता और इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा नहीं हो सकता, तो कुलपति को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
एनएसयूआई ने मांग की है कि सत्या निकेतन त्रासदी की परिस्थितियों की तत्काल जांच और जवाबदेही तय की जाए, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, विश्वविद्यालय के हॉस्टलों और छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे निजी आवासों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, डीयू प्रशासन त्रासदी से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों से तत्काल संवाद करे और उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे और छात्रों की सुरक्षा और आवास से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था स्थापित की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी