एनएसयूआई ने एनटीए पर प्रतिबंध लगाने और व्यापक परीक्षा सुधारों की उठाई मांग
नई दिल्ली, 27 जुलाई (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग की कड़ी निंदा की।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि जब नीट परीक्षा का पेपर लीक हुआ, तब सबसे पहले एनएसयूआई ही सड़कों पर उतरी थी। पेपर लीक वाले दिन से ही कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में आंदोलन शुरू कर दिया था। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं पर वाटर कैनन चलाए गए, लाठीचार्ज किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया, लेकिन छात्रों के भविष्य की लड़ाई से पीछे नहीं हटे। लगातार जनदबाव और इस मुद्दे को मजबूती से उठाए जाने के बाद ही सरकार को नीट पेपर लीक की गंभीरता स्वीकार करनी पड़ी।
हालिया छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए विनोद जाखड़ ने कहा कि आज वही तस्वीर फिर देखने को मिल रही है। जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों पर वाटर कैनन चलाए गए। बिहार में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा एके-47 से फायरिंग करते हुए सामने आए दृश्य ने पूरे देश को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार के छात्र आंदोलनों के प्रति रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में अपनी आवाज उठाने आए छात्राओं पर पीछे से लाठियां बरसाई गईं और पुलिस कार्रवाई के दौरान अत्यंत चिंताजनक दृश्य सामने आए।
विनोद जाखड़ ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद से करने के बजाय बल प्रयोग के माध्यम से उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
विनोद जाखड़ ने कहा कि एनएसयूआई की प्रमुख मांग है राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए तथा उसकी जगह एक विश्वसनीय, पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा प्रणाली स्थापित की जाए, बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित सशस्त्र बल प्रयोग की राजनीतिक जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस्तीफा दें, आईटीपीआई मान्यता घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) तथा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) से जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, देशभर में पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और छात्र हितैषी परीक्षा व्यवस्था लागू की जाए और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, दोषियों को कठोर सजा सुनिश्चित करने तथा छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाया जाए।
जाखड़ ने कहा कि निष्पक्ष परीक्षाओं, पारदर्शिता और न्याय की मांग करने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी