एनएसयूआई का “अभिव्यक्ति” कार्यक्रम ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक के खिलाफ बना मजबूत आवाज
नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के स्थापना सप्ताह के अवसर पर आयोजित एक प्रभावशाली और संवादपूर्ण कार्यक्रम “अभिव्यक्ति” के माध्यम से एनएसयूआई ने छात्रों और राष्ट्रीय नेतृत्व को एक मंच पर लाते हुए अधिकार, समानता और परिसर लोकतंत्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ तथा रागिनी नायक की उपस्थिति रही।
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए सुप्रिया श्रीनेत ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित संशोधन विधेयक के पीछे की मंशा पर गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि जब संसद में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपनी पहचान का प्रमाण देने के लिए बाध्य नहीं किया जाता, तो सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को अपनी पहचान साबित करने के लिए क्यों मजबूर कर रही है? उन्होंने इस प्रावधान को गरिमा और समानता के विरुद्ध बताते हुए इसे आत्म-पहचान के मौलिक अधिकार पर सीधा आघात करार दिया।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाते हुए इस विधेयक के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संरक्षण के लिए नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय को नियंत्रित करने और उनका अपमान करने के लिए लाया गया है। एनएसयूआई देशभर में आंदोलन छेड़ेगी परिसर से सड़कों तक और तब तक पीछे नहीं हटेगी जब तक इस ट्रांसजेंडर विरोधी कानून को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता।
रागिनी नायक ने भी चर्चा में भाग लिया। इस दौरान हजारों छात्रों ने सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी दर्ज कराई, विधेयक के प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
कार्यक्रम का समापन एनएसयूआई नेतृत्व और छात्रों के इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि वे ट्रांसजेंडर समुदाय के समानता, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी