‘मिशन अनमोल’ को मंजूरी, नवजातों की स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ाकर 2.5 लाख किया

 


नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य देखभाल और स्क्रीनिंग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए दिल्ली सरकार ने ‘मिशन अनमोल’ को लागू करने की मंजूरी दे दी है। यह एक बेहद महत्वपूर्ण और विस्तृत नवजात शिशु स्क्रीनिंग कार्यक्रम है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राजधानी दिल्ली में जन्म लेने वाले हर शिशु में जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान कर उनका उचित इलाज सुनिश्चित करना है।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने कहा कि ‘मिशन अनमोल’ पहल के तहत अब हर साल 1.5 लाख की जगह लगभग 2.5 लाख नवजात शिशुओं की पूरी स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग हर नवजात की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने हमारा लक्ष्य है। इस विस्तार से कई प्रकार की मेटाबॉलिक, एंडोक्राइन और फंक्शनल और जन्मजात बीमारियों की समय रहते पहचान और समुचित इलाज सुनिश्चित होगा, जिससे भविष्य में नवजातों के स्वास्थ्य परिणामों में काफी सुधार होगा।

मंत्री ने बताया कि ‘मिशन अनमोल’ पहल एक एकीकृत और टेक्नोलॉजी-आधारित कार्यक्रम है, जिसे राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों और सबसे अच्छे तरीकों के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि हर नवजात शिशुओं की पूरी स्क्रीनिंग को एक मानक के रूप में स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म, जन्मजात हृदय रोग, सुनने की समस्या और समय से पहले जन्मे बच्चों में होने वाली आंखों की बीमारी (रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी) जैसी स्थितियों के साथ जन्मजात बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाएगी, ताकि प्रभावित बच्चों का समय रहते उपचार सुनिश्चित हो सके और उनके जीवन को और बेहतर बनाया जा सके।

मंत्री ने कहा कि इसके लिए कुल 148 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें मौजूदा 73 प्रयोगशाला और फील्ड कर्मचारियों के पदों को जारी रखा गया है। साथ ही में 60 स्टाफ नर्सों और 15 ऑप्टोमेट्रिस्ट के रूप में अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई है। स्टाफ नर्सें नवजात शिशुओं, विशेषकर समय से पहले जन्मे और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के सैंपल लेने, सुरक्षित देखभाल के समन्वय को सुनिश्चित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। वहीं, ऑप्टोमेट्रिस्ट पूरे राज्य में नवजातों की आंखों की स्क्रीनिंग ('रेटिनोपैथी ऑफ़ प्रीमैच्योरिटी') में सहयोग करेंगे, ताकि नवजात शिशुओं में अंधेपन की समस्या को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि हर नवजात की अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले पूरी तरह से स्क्रीनिंग सुनिश्चित हो सके। खासतौर पर उन अस्पतालों और नवजात गहन देखभाल इकाइयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां प्रसव की संख्या बहुत अधिक होती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव